lekhak: शिंजिनी

शिंजिनी की कविताएँ

शिंजिनी की कविताएँ

कविता यदि आपके भीतर सोई पड़ी है, तो वह एक दिन उठ बैठेगी. वह भीतर-ही-भीतर आपका पीछा करती रहती है ...