फिल्म

एक छपे रिसाले के लिए विलम्बित मर्सिया : विष्णु खरे

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप की मुंबई से 1951 में शुरू हुई अंग्रेजी की फ़िल्म – पत्रिका ‘स्क्रीन’ के प्रिंट संस्करण के बंद होने की खबर है. ‘स्क्रीन’ कुछ उन पुरानी...

ईदा (Ida) : विष्णु खरे

विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में इतिहास और भूगोल की यात्रा करती 2013 के आस्कर से सम्मानित पावेल पाव्लिकोस्की की पोलिश फिल्म ‘’ईदा’’ कई कारणों से चर्चा में है. इस फ़िल्म के...

ऐब (A.I.B) : विष्णु खरे

ऐब (AIB) ने जिस तरह से गालियों और अश्लीलता की मार्केटिंग शुरू की है और उसे एक मूल्य में बदल दिया है, उससे उसके तात्कालिक असर तो दिखने शुरू हो...

शर्ली एब्दो और पीके : विष्णु खरे

पेरिस में ही पैदा हुए दार्शनिक वाल्तेयर (Voltaire : 1694 – 1778) अभिव्यक्ति की आज़ादी के सबसे बड़े पैरोकार माने जाते हैं. वह कहा करते थे कि तुम्हारी बात से...

सनी लिओने : विष्णु खरे

किसी भी व्यस्क समाज में यौन – विषयों को सहजता से लेने की नैतिकता रहती है. कामसूत्र के देश से इतने साहस की उम्मीद आज भी किया जाना चाहिए कि...

परख और परिप्रेक्ष्य : दादा साहब फाल्के

   दादा साहेब फ़ाल्के : सिनेमा के हस्ताक्षर दिलनवाज़भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फ़ाल्के उर्फ़ धुंदी राज गोविंद फ़ाल्के का जन्म महाराष्ट्र मे नासिक के करीब एक गांव मे 30 अप्रैल 1870 को हुआ. फ़ाल्के मे कला...

अमिताभ का सिनेमा: सुशील कृष्ण गोरे

महाकाव्य और नाटक ने आधुनिक युग में उपन्यास और सिनेमा के रूप में अपना कायांतरण किया. सिनेमा अनंत दर्शक समूह और पूंजी से जुड़कर एक बड़े सांस्कृतिक उद्योग में बदल...

रंग – राग : लेकिन : मिथक का यथार्थ: गोपाल प्रधान

फ़िल्मलेकिन : मिथक का यथार्थगोपाल प्रधान बीसवीं सदी के नब्बे दशक के शुरू में आई फ़िल्म लेकिन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण थी. इसके गीतों के बाद से ही हिन्दी फ़िल्मों...

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