गांधी सप्ताह के इस समापन अंक में आप युवा अध्येता रूबल और लेखिका के. मंजरी श्रीवास्तव की गांधी और स्त्री-प्रश्न...
Read moreDetailsभारतीय स्वाधीनता आंदोलन ने स्त्रियों को गहरे प्रभावित किया, जिस समाज में उनकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग नगण्य थी गांधी के...
Read moreDetailsगांधी जी का हिंदी और साहित्य से गहरा रिश्ता रहा है, उनपर बड़े कवियों ने कविताएँ लिखीं हैं. अभी भी...
Read moreDetailsसुरेंद्र मनन लेखक के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित फ़िल्मकार हैं. गांधी पर उनकी फ़िल्म ‘गाँधी अलाइव इन साउथ अफ्रीका’...
Read moreDetailsमहात्मा गांधी ने सिर्फ़ राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता ही प्रशस्त नहीं किया भारतीय समाज को सत्य, करुणा और बराबरी के...
Read moreDetailsवरिष्ठ लेखक और नाटककार असग़र वजाहत ने 2012 में नाटक लिखा था- ‘गोडसे@गांधी. कॉम’. इधर उन्होंने अपना नया नाटक पूरा...
Read moreDetailsराष्ट्रपिता गांधी की हत्या भारतीय सभ्यता का ऐसा घाव है जो अभी भी खुला हुआ है और दुखता रहता है....
Read moreDetailsआज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवित रहते तो 153 साल के होते. इसी देश में, स्वतंत्र भारत में अपनी स्वाभाविक उम्र...
Read moreDetailsबीसवीं शताब्दी को प्रसिद्ध इतिहासकार एरिक हॉब्सबॉम ने अतियों का युग (The Age of Extremes) कहा है. 21वीं शताब्दी में...
Read moreDetailsकविताएँ प्रतीकों का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें बदल भी देती हैं और उनके सामने प्रतिरोध में खड़ी भी हो जाती...
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समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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