समीक्षा

कई चाँद थे सरे आसमाँ: गोपाल प्रधान

कई चाँद थे सरे आसमाँ: गोपाल प्रधान

“मुद्दतों बाद उर्दू में एक ऐसा उपन्यास आया है, जिसने हिंदो–पाक की अदबी दुनिया में हलचल मचा दी है. क्या इसका मुकाबला उस हलचल से किया जाय जो उमराव जान...

शिगाफ़ : सुमन केशरी

शिग़ाफ़ : दरारों पर पुल बनाने की कोशिशसुमन केशरी राजकमल से २०१० में प्रकाशित मनीषा कुलश्रेष्ठ के  उपन्यास शिगाफ पर जिज्ञासा द्वारा आयोजित परिचर्चा में सुमन केशरी का आलेख. कृति...

रावी लिखता है : अब्दुल बिस्मिल्लाह

रावी लिखता है(उपन्यास)अब्दुल बिस्मिल्लाह .प्रथम संस्करण-2010.मूल्य-200 रूपए.राजकमल प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली-02ग्लोबल मुस्लिम जगत के बयानपुखराज जाँगिड़अब्दुल बिस्मिल्लाह  का नया उपन्यास ‘रावी लिखता है’ (2010) पहली बार ‘बया’ (दिसंबर 2007) में हिंदी में तथा अनुदित रूप में...

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