बटरोही : हम तीन थोकदार (तीन)
वरिष्ठ कथाकार बटरोही के आख्यान ‘हम तीन थोकदार’ की यह तीसरी क़िस्त है. लॉक डाउन से होते हुए बचपन, आस पड़ोस और फिर तीन थोकेदार जो अब धीरे-धीरे अपना व्यक्तित्व...
वरिष्ठ कथाकार बटरोही के आख्यान ‘हम तीन थोकदार’ की यह तीसरी क़िस्त है. लॉक डाउन से होते हुए बचपन, आस पड़ोस और फिर तीन थोकेदार जो अब धीरे-धीरे अपना व्यक्तित्व...
हिंदी के वरिष्ठ कथाकार लक्ष्मण सिंह बिष्ट \'बटरोही\' ने इसी २५ अप्रैल को अपना ७५ वां जन्म दिन मनाया है, उन्हें अब यह लगने लगा है कि जिस कहानी को...
(Artwork of Johnson Tsang)संपादक प्रथम पाठक है, कई बार रचनाएँ उसे उसी तरह ही सुख देती हैं तब वह आनायास ही पाठक की तरह चाहता है कि जो आनंद उसे...
तस्वीर : आभार सहित Sughosh Mishraहिंदी के कवि व्योमेश शुक्ल, इधर रंगकर्मी, प्रखर. उनके निर्देशित नाटकों ने देश भर में ध्यान खींचा है, कामायनी, राम की शक्ति पूजा, रश्मिरथी चित्रकूट...
लगभग सभी संस्कृतियों में शिक्षण का पेशा पवित्र और आदरणीय माना गया है, और समाज शिक्षकों से ज्ञान के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार जैसी अनेक जिम्मेदारियों की अपेक्षा करता है....
‘डार से बिछुड़ी’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘यारों के यार : तिन पहाड़’, ‘सूरजमुखी अंधेरे के’, ‘सोबती एक सोहबत’, ‘जिंदगीनामा’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘बादलों के घेरे’, ‘हम हशमत’...
गोरख पांडेय (१९४५ – ८९, देवरिया)जे.एन.यू से ज्यां पाल सात्र के अस्तित्ववाद में अलगाव के तंतुओं पर पी.एच.-डी.जागते रहो सोने वालों और स्वर्ग से विदाई कविता संग्रह प्रकाशित भोजपुरी में भी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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