बातचीत

मैं कहता आँखिन देखी : रंजना अरगड़े

शमशेर बहादुर सिंह (१९११-१९९३) की जन्म शताब्दी वर्ष पर समालोचन की विशेष प्रस्तुति\"एक कवच मैं और ओढ़ना चाहता हूँएक अदृश्य कवच - निरहंकार,तटस्थतमनिर्मलता का\".                                                       डायरी-६/मार्च/१९६३ कई बार ऐसा लगता है कि...

Page 8 of 8 1 7 8

फ़ेसबुक पर जुड़ें