विट्ठलनाथ, कृष्णदास और श्रीनाथ मन्दिर का सत्ता संघर्ष : भगवानदास मोरवाल
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
Home » कृष्णदास और श्रीनाथ मन्दिर का सत्ता संघर्ष
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum