महात्मा और मशीन : अभय कुमार
मशीनों के बिना मनुष्य की कल्पना करना आज असंभव है. कहीं ऐसा तो नहीं कि वे हमें संचालित करने लगी ...
Home » क्या गांधी मशीनों के विरोधी थे
मशीनों के बिना मनुष्य की कल्पना करना आज असंभव है. कहीं ऐसा तो नहीं कि वे हमें संचालित करने लगी ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2026 समालोचन | powered by zwantum