सलमान रुश्दी से ग्रांटा के संपादक थॉमस मीनी की बातचीत : अनुवाद : प्रभात रंजन
बिना विश्वदृष्टि के कोई लेखक सचमुच बड़ा नहीं हो सकता. उससे सहमत-असहमत हुआ जा सकता है. इसमें कोई संदेह नहीं ...
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