प्रफुल्ल कोलख्यान से महेश मिश्र की बातचीत
साहित्य, संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण-विमर्श के क्षेत्र में प्रफुल्ल कोलख्यान का नाम सुपरिचित है. विभिन्न विषयों पर उनसे महेश मिश्र ...
Home » महेश मिश्र
साहित्य, संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण-विमर्श के क्षेत्र में प्रफुल्ल कोलख्यान का नाम सुपरिचित है. विभिन्न विषयों पर उनसे महेश मिश्र ...
जैसा समय चल रहा है, उसमें गंभीर, प्रमाणिक और आलोचनात्मक लेखन की जगह न केवल सिकुड़ती जा रही है, बल्कि ...
अंग्रेजी रोमांटिक कविता आंदोलन के प्रमुख कवि शेली का निबंध ‘A Defence of Poetry’, जो 1821 में लिखा गया था ...
लेखक के भीतर, उसके तलघर में, निरंतर जटिल, बहुआयामी, चेतन-अचेतन अंतःक्रियाएँ चलती रहती हैं, जबकि पाठक केवल रचना को देखता ...
लास्लो क्रास्नाहोर्काई को 2025 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलने के साथ ही, ऐडम थर्लवेल द्वारा लिया गया उनका लंबा, ...
महान अकीरा कुरोसावा की 1952 की क्लासिक फ़िल्म इकिरू (Ikiru) मनुष्य के अस्तित्व और उसकी सार्थकता के प्रश्न को बेहद ...
एली वीज़ल (1928–2016) केवल एक लेखक नहीं, बल्कि इतिहास के सबसे गहरे घाव के जीवित साक्षी थे. होलोकॉस्ट से बच ...
इसाबेल अयेंदे के उपन्यास ईवा लूना का स्पेनिश से अंग्रेज़ी अनुवाद 1988 में हुआ और शीघ्र ही इसने अपनी एक ...
अश्वघोष का ‘बुद्धचरित’ धार्मिक ही नहीं, साहित्यिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है. यह एक ऐसा महाकाव्य है, जो भारत में ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum