जेन ज़ी के लिए कविताएँ : शैलेन्द्र चौहान
जेन ज़ी की भाषा को समझने में पुरानी पीढ़ियों को भले कठिनाई हो, उनकी संवेदनाओं, बेचैनियों और संघर्षों को समझने ...
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जेन ज़ी की भाषा को समझने में पुरानी पीढ़ियों को भले कठिनाई हो, उनकी संवेदनाओं, बेचैनियों और संघर्षों को समझने ...
72 वर्षीय कवि-लेखक शैलेन्द्र चौहान की इन कविताओं में हमारे समय की ऐसी सच्चाइयाँ हैं, जिनसे हमारा सामना प्रतिदिन होता ...
हमारे बचपन में एक क़ुतुबनुमा (compass) रहता था. अचरज से देखते थे कि देखो उत्तर (दिशा) तलाश ही लेता है. ...
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