चार नृत्यकार : अशोक वाजपेयी से पीयूष दईया की बातचीत
साहित्य के साथ संगीत, नृत्य, चित्रकला, शिल्प, फ़िल्म और रंगमंच जैसी कलाएँ मिलकर किसी समाज की सहृदयता और सांस्कृतिक परिपक्वता का दृश्य रूप निर्मित करती हैं. हिंदी समाज में इन...
साहित्य के साथ संगीत, नृत्य, चित्रकला, शिल्प, फ़िल्म और रंगमंच जैसी कलाएँ मिलकर किसी समाज की सहृदयता और सांस्कृतिक परिपक्वता का दृश्य रूप निर्मित करती हैं. हिंदी समाज में इन...
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित जयपुर घराने की वरिष्ठ कथक नृत्यांगना प्रेरणा श्रीमाली की पुस्तक ‘तत्कार’ की चर्चा कर रहीं है प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ. इस पुस्तक का प्रकाशन...
पंडित बिरजू महाराज पर के. मंजरी श्रीवास्तव का संस्मरणात्मक-आलेख आपने देखा- ‘मेरे बिरजू महाराज’. नृत्य प्रस्तुतियों को सहृदय किस तरह ग्रहण करते हैं और कैसे उनकी स्मृतियों में भंगिमाएं रच...
भारतीय नृत्य के प्रतीक कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का पिछले दिनों 17 जनवरी (२०२२) को देहावसान हो गया. वह शिक्षक भी थे. ‘कलाश्रम’ से वह आजीवन कलाओं के संवर्धन...
१९ वीं और २० वीं सदी की संधि बेला हिंदुस्तान में कला, संगीत, नृत्य के लिए किसी आपदा से कम नहीं, ख़ासकर इनसे जुड़ीं स्त्रियों के लिए. उनपर दोहरी मार...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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