बस एक सीट के लिए : मनोज कुमार पांडेय
हिंदी कहानी ही नहीं, किसी भी भाषा की कहानी के सामने दृश्य माध्यमों ने बड़ी चुनौती उपस्थित कर दी है. ऐसे में कहानी के बचे रहने की एक राह शायद...
हिंदी कहानी ही नहीं, किसी भी भाषा की कहानी के सामने दृश्य माध्यमों ने बड़ी चुनौती उपस्थित कर दी है. ऐसे में कहानी के बचे रहने की एक राह शायद...
साहित्य के भीतरी दाँव-पेंच पर संजय कुंदन की यह नई कहानी रोचक और पठनीय है. ऐसे ‘कविराज’ साहित्य के केन्द्रों पर विराजमान हो ही जाते थे. अब भी शायद कहीं-कहीं...
सम्पूर्ण संस्कृति ही मनुष्य-रचित एक विराट कथा है. इसी में हम जीते-मरते हैं. यह हमारा ही कल्पित संसार है. इस लम्बी यात्रा में कथाएँ हमारे साथ रही हैं. सहारा देती...
प्रख्यात कवि कुँवर नारायण की जन्मशती 19 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है. चिंतनपरक निबंध, कहानियाँ, अनुवाद तथा कलाओं और फ़िल्मों पर लिखा गया उनका लेखन भी अत्यंत महत्वपूर्ण...
उर्दू में क्या शानदार कहानियाँ लिखी जा रही हैं. ‘बेधक’ और ‘मार्मिक’ जैसे शब्दों के अर्थ अशअर नज्मी की कहानी ‘लुक्का-छिपी’ पढ़ते हुए आप पर कुछ इस तरह तारी हो...
मानव की सबसे बड़ी समस्या ही यही है कि वह बहुत जल्दी मनुष्य हो गया. वह इतनी तेजी से सामाजिक और मानसिक रूप से बदला है कि उसकी युगों पुरानी...
उर्दू अफ़सानों की दुनिया में नय्यर मसूद (16 नवम्बर, 1936 - 24 जुलाई, 2017) का ख़ास और ऊँचा मक़ाम है. उनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी-हिंदी सहित अनेक भाषाओं में हुए...
प्रमाण दिखाने और ख़ुद को साबित करने की इस महामारी में न जाने कितने लोग पिस रहे हैं. आधार कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, शजरा, खसरा, पट्टा और नागरिकता के...
इस समय का एक यथार्थ यह भी है कि हम स्वयं को सतत निगरानी में पाते हैं. हमारी लगभग सभी व्यक्तिगत सूचनाएँ या तो सार्वजनिक हैं, या उन्हें आसानी से...
वसीम अहमद अलीमी की प्रस्तुत कहानी ‘सज्दा और समाधि’ सत्रहवीं सदी के बनारस में रहने वाले साधु और एक सूफ़ी संत की दोस्ती पर आधारित है. कहानी में ये दोनों...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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