नुसरत : नय्यर मसूद : अनुवाद: आयशा आरफ़ीन
उर्दू अफ़सानों की दुनिया में नय्यर मसूद (16 नवम्बर, 1936 - 24 जुलाई, 2017) का ख़ास और ऊँचा मक़ाम है. उनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी-हिंदी सहित अनेक भाषाओं में हुए...
उर्दू अफ़सानों की दुनिया में नय्यर मसूद (16 नवम्बर, 1936 - 24 जुलाई, 2017) का ख़ास और ऊँचा मक़ाम है. उनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी-हिंदी सहित अनेक भाषाओं में हुए...
प्रमाण दिखाने और ख़ुद को साबित करने की इस महामारी में न जाने कितने लोग पिस रहे हैं. आधार कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, शजरा, खसरा, पट्टा और नागरिकता के...
इस समय का एक यथार्थ यह भी है कि हम स्वयं को सतत निगरानी में पाते हैं. हमारी लगभग सभी व्यक्तिगत सूचनाएँ या तो सार्वजनिक हैं, या उन्हें आसानी से...
वसीम अहमद अलीमी की प्रस्तुत कहानी ‘सज्दा और समाधि’ सत्रहवीं सदी के बनारस में रहने वाले साधु और एक सूफ़ी संत की दोस्ती पर आधारित है. कहानी में ये दोनों...
डिस्टोपियन कथा-साहित्य का समृद्ध इतिहास है और उसकी शिखर कृतियों में जॉर्ज ऑरवेल का ‘1984’ अग्रणी स्थान रखता है. यह एक सर्वकालिक क्लासिक है. डिस्टोपियन साहित्य का महत्व केवल भविष्य...
जीवन अप्रत्याशित घटनाओं से भरा है. जीवन भी एक संयोग ही है. जब कभी आकस्मिक प्रेम अनायास घटता है, तो एक रोशनी-सी फैल जाती है. यदि यह प्रेम पकी उम्र...
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ उपन्यास ‘दण्ड प्रहार’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. इन...
अर्न्स्ट फिशर ने बहुत पहले रेखांकित किया था कि कला का जादू इसमें निहित है कि हम एक ऐसे अनुभव को अपना बना लेते हैं, जो हमारा नहीं है. संजय...
हरे प्रकाश उपाध्याय का एक उपन्यास प्रकाशित हो चुका है. वे कहानियाँ भी लिख रहे हैं, पर मूलतः कवि हैं. गाँव से उखड़कर शहर में जीने की ज़द्दोजहद से ऐसी...
युवा कथाकार कैफ़ी हाशमी की नई कहानी ‘चाबी’ 21वीं सदी की बदलती हिंदी कहानी का चेहरा है. यह महानगरों के अस्थिर और भंगुर जीवन-दर्शन की प्रतिनिधि कथा है. अतीत और...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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