कथा

हत्यारा: वैभव सिंह

हत्यारा: वैभव सिंह

आलोचक वैभव सिंह इधर कहानियाँ भी लिख रहें हैं, साहित्य की विधाओं के बीच यह आवाजाही स्वागतयोग्य है. प्रस्तुत कहानी अपराध, राजनीति, धर्म और पत्रकारिता के एक दूसरे में घुलमिल...

अमर देसवा: प्रवीण कुमार

अमर देसवा: प्रवीण कुमार

दो चर्चित कहानी संग्रहों के बाद प्रवीण कुमार का यह पहला उपन्यास है- ‘अमर देसवा’ जो कोरोना में आम आदमी की बेबसी, दर्द और अकेलेपन के बीच सुलगते उबलते आक्रोश...

तिलांजलि: ललिता यादव

तिलांजलि: ललिता यादव

ललिता यादव की यह कहानी भरे-पूरे घर में बहनों और भाइयों से आरम्भ होकर उनके अलग-अलग होने तक जाती है, फिर जब वे मिलते हैं उनकी कहानियां भी आकर मिलती...

आख़िरी ख़त: सुभाष शर्मा

आख़िरी ख़त: सुभाष शर्मा

जापान के प्रो. हाइचाबूरो और उनके कुत्ते हचीको की कथा आपने सुनी होगी, इस कहानी में भी यह प्रसंग आया है. एक भारतीय जब जापानी युवती से मिलता है तो...

चमड़े का अहाता: दीपक शर्मा

चमड़े का अहाता: दीपक शर्मा

लेखिका दीपक शर्मा के अब तक उन्नीस कथा-संग्रह प्रकाशित हुए हैं. आपने उनकी कितनी चर्चा सुनी है ? अव्वल तो यह एक कहानी ही उन्हें प्रसिद्ध करने के लिए पर्याप्त...

पिल्ले : हीरालाल नागर

पिल्ले : हीरालाल नागर

कोरोना में आफत मनुष्यों पर तो थी ही, पशु भी इससे प्रभावित हुए. हीरालाल नागर ने कुत्तों ख़ासकर जो पालतू नहीं हैं उनसे जुड़ी यह कहानी लिखी है. हीरालाल नागर...

और तितली उड़ गई: नूतन डिमरी गैरोला

और तितली उड़ गई: नूतन डिमरी गैरोला

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला पेशे से चिकित्सक हैं और कविताएं लिखती हैं, संग्रह प्रकाशित हो रखा है. कुछ महीनों पहले ‘महादेवी वर्मा स्मृति’ पेज पर उनकी इस कहानी का वाचन...

राहतें और भी हैं: रश्मि शर्मा

राहतें और भी हैं: रश्मि शर्मा

रश्मि शर्मा की कहानी, ‘राहतें और भी हैं’ पढ़ते हुए अनामिका का यह कथन याद आता रहा कि ‘“नई स्त्री बेतरहा अकेली है. क्योंकि उसको अपने पाये का धीरोदात्त, धीरललित,...

ख़ाली जगह: प्रवीण कुमार

ख़ाली जगह: प्रवीण कुमार

प्रवीण कुमार की कहानियों पर लिखते हुए कथाकार और ‘तद्भव’ के संपादक अखिलेश ने ‘हिंसा के सूक्ष्म रूपों को भी ओझल नहीं होने देते’ ऐसा रेखांकित किया है. त्रासदी, उत्पीड़न,...

पुनर्निर्माण-2:  अम्बर पाण्डेय

पुनर्निर्माण-2: अम्बर पाण्डेय

‘कास्ट आयरन की इमारत’ शीर्षक से अम्बर पाण्डेय की कहानी छपी है जिसे किसी उपन्यास के हिस्से की तरह भी देखा जा सकता है. इसी तरह ‘पुनर्निर्माण’ को भी स्वतंत्र...

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