गौतम बुद्ध और बुद्धावतार भिन्न अथवा अभिन्न : कुशाग्र अनिकेत
विष्णु के नवम अवतार के रूप में बुद्ध की उपस्थिति विद्वानों के बीच तीव्र मतभेद का विषय रही है. प्रायः इसे बुद्ध की उपेक्षा, उनके व्यक्तित्व और विचारों के विरूपण...
विष्णु के नवम अवतार के रूप में बुद्ध की उपस्थिति विद्वानों के बीच तीव्र मतभेद का विषय रही है. प्रायः इसे बुद्ध की उपेक्षा, उनके व्यक्तित्व और विचारों के विरूपण...
‘नेमत ख़ाना’ के अंग्रेज़ी अनुवाद के लिए ‘जेसीबी प्राइज़’ (2022) से सम्मानित ख़ालिद जावेद इस समय उर्दू के शीर्ष कथाकारों में शुमार हैं. ‘मौत की किताब’, ‘नेमत ख़ाना’, ‘एक ख़ंजर...
आधुनिक हिन्दी साहित्य का आरम्भ हालाँकि नाटकों से हुआ, पर आलोचना के केंद्र में कविता ही रही है. सौन्दर्य के साथ-साथ समाज और राजनीति को भी वह परखती चली आई...
यह नामवर सिंह (28 जुलाई, 1926-19 फ़रवरी, 2019)का जन्मशताब्दी वर्ष है और आज उनकी पुण्यतिथि भी है. वरिष्ठ आलोचक रविभूषण का यह आलेख नामवर सिंह के छात्र-जीवन का विवेचन करते...
साहित्य और इतिहास का संबंध अनुकरण या प्रतिबिंब का नहीं है. यह एक जटिल अंतःसंवाद है, जिसमें इतिहास साहित्य के हाथों पुनर्रचित होता है. घटना, जब संवेदना से अनुप्राणित होती...
मुक्तिबोध को हिंदी आलोचना के केंद्र में स्थापित करने वाली वैचारिक प्रक्रिया में नामवर सिंह का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. उनके कवि, कथाकार, आलोचक और पत्रकार रूपों पर व्यापक चर्चा...
हिंदी की आलोचना-परंपरा में रविभूषण उन प्रमुख आवाज़ों में से हैं जिन्होंने अपने साहस और वैचारिक निरंतरता से पाँच दशकों से मार्क्सवादी-आलोचना को ज़िन्दा रखा हुआ है. ‘फ़ासीवाद की दस्तक’,...
आज जब पुरुषोत्तम अग्रवाल सत्तर वर्ष के हो चुके हैं, उन्हें याद करना अपने प्रिय शिक्षक, मित्र और मार्गदर्शक को याद करना है. यह उनके बौद्धिक महत्व और आलोचनात्मक हस्तक्षेप...
एक ऐसे समय में, जब सोशल मीडिया के कारण चित्त की चंचलता बढ़ी है, एकाग्रता की अवधि घट गई है, और गंभीर पठन को रीलों के तूफ़ान ने लगभग अपदस्थ...
कथाकार अमरकांत (1925–2014) की यह जन्मशती है. आज ही के दिन, 1925 में उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के भगमलपुर गाँव में हुआ था. उन्हें प्रेमचंद की यथार्थवादी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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