आलोचना

‘गोदान’ में ‘स्पेकुलेशन’ की चर्चा: रविभूषण

‘गोदान’ में ‘स्पेकुलेशन’ की चर्चा: रविभूषण

कालजयी कृतियाँ अपने पाठ की असीम संभावनाएं समेटे रहती हैं. ‘गोदान’(1936) को तरह-तरह से पढ़ा गया है पर जिस तरह से वरिष्ठ और महत्वपूर्ण आलोचक रविभूषण ने विवेचित किया है...

स्त्रीवादी आलोचना का श्वेत-पत्र:  रोहिणी अग्रवाल

स्त्रीवादी आलोचना का श्वेत-पत्र: रोहिणी अग्रवाल

प्रो. रोहिणी अग्रवाल कई दशकों से स्त्रीवाद की सैद्धांतिकी और उसकी व्यावहारिक आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस विषय पर उनकी दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं....

संत पलटू: सदानंद शाही

संत पलटू: सदानंद शाही

भक्ति आंदोलन भारतीय भाषाओं का समवेत और संयुक्त आंदोलन था जो अपने स्वरूप में मानवीय और क्रांतिकारी था. यह ईश्वर तक आमजन की पहुंच का कर्मकांड रहित जनांदोलन तो था...

नलिन विलोचन शर्मा की इतिहास-दृष्टि: गोपेश्वर सिंह

नलिन विलोचन शर्मा की इतिहास-दृष्टि: गोपेश्वर सिंह

नलिन विलोचन शर्मा की आलोचना-पद्धति ख़ासकर उनकी इतिहास-दृष्टि की चर्चा देखने को कम मिलती है. आलोचक गोपेश्वर सिंह ने इस आलेख में इस कमी को कुछ हद तक पूरा किया...

मैनेजर पाण्डेय की इतिहास-दृष्टि:  हितेन्द्र पटेल

मैनेजर पाण्डेय की इतिहास-दृष्टि: हितेन्द्र पटेल

समाज-विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र पर मूल रूप से हिंदी में लिखने वाले स्तरीय लेखक कम हैं. हिंदी के विषयों पर लिखने वाले समाज-विज्ञानी तो और भी कम हैं, हितेंद्र पटेल इतिहास...

रोहिणी अग्रवाल की आलोचना  सौन्दर्य: आशीष कुमार

रोहिणी अग्रवाल की आलोचना सौन्दर्य: आशीष कुमार

लगभग तीन दशकों से कथा-आलोचना और स्त्री-चेतना के क्षेत्र में सक्रिय रोहिणी अग्रवाल की दस से अधिक आलोचनात्मक कृतियाँ प्रकाशित हुईं हैं. उनकी आलोचना-दृष्टि पर यह आलेख आशीष कुमार ने...

पाण्डुलिपि के पृष्ठों पर बहस: पंकज कुमार बोस

पाण्डुलिपि के पृष्ठों पर बहस: पंकज कुमार बोस

कथाकार प्रवीण कुमार की कहानी ‘रामलाल फ़रार है’ पर आधारित पंकज कुमार बोस का यह आलेख दिलचस्प और विचारोत्तेजक है. लेखक और उसके कल्पित पात्रों के बीच के सृजनात्मक तनाव...

मुख्य धारा बनाम हाशिये की कविता:  दया शंकर शरण

मुख्य धारा बनाम हाशिये की कविता: दया शंकर शरण

हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक मैनेजर पाण्डेय आगामी २३ सितम्बर को अस्सी वर्ष के हो रहें हैं. इसे ध्यान में रखते हए पिछले कई महीनों से समालोचन उनपर केन्द्रित आलेख प्रकाशित...

प्रतिरोध के अभिप्राय और तुलसीदास का महत्त्व: माधव हाड़ा

प्रतिरोध के अभिप्राय और तुलसीदास का महत्त्व: माधव हाड़ा

किसी कवि की इससे बड़ी सफलता क्या होगी कि उसका काव्य इतना लोकप्रिय हो जाए कि घर में किसी मांगलिक आयोजन से पहले उसका सामूहिक पाठ किया जाए, और विडंबना...

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