फिल्म

मणि कौल: दृश्यों की अंतर-ध्वनि का फ़िल्मकार: सुदीप सोहनी

मणि कौल: दृश्यों की अंतर-ध्वनि का फ़िल्मकार: सुदीप सोहनी

विनोद कुमार शुक्ल ने पीयूष दईया से संवाद (समालोचन पर प्रकाशित) में फ़िल्मकार मणि कौल के विषय में यह कहा है कि ‘दर्शक मणि कौल की फिल्म में उसी तरह...

दिलीप कुमार: हमारे बाद इस महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे: सत्यदेव त्रिपाठी

दिलीप कुमार: हमारे बाद इस महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे: सत्यदेव त्रिपाठी

सत्यदेव त्रिपाठी फ़िल्मों और रंगमंच पर वर्षों से लिखते रहें हैं, इन विषयों पर उनकी कई क़िताबें प्रकाशित हुईं हैं. अभिनेता दिलीप कुमार पर लिखा गया यह लेख दरअसल सत्यदेव...

दिलीप कुमार और उनका सिनेमा: सुशील कृष्ण गोरे

दिलीप कुमार और उनका सिनेमा: सुशील कृष्ण गोरे

अभिनेता दिलीप कुमार की प्रसिद्धि असाधारण थी, वह अद्वितीय हैं. जिस तरह से उनके व्यक्तित्व में गहराई है उसी तरह से उनके अभिनय की भी अनेक परतें हैं. सुशील कृष्ण...

समलैंगिकता, सेक्सुअलिटी और सिनेमा: आशीष कुमार

समलैंगिकता, सेक्सुअलिटी और सिनेमा: आशीष कुमार

समाज में पुरुष-समलैंगिकता लज्जा और उत्पीड़न तथा फिल्मों में उपहास का विषय रही है. इधर कुछ संवेदनशील निर्देशकों ने इस विषय पर मार्मिक फ़िल्में बनाई हैं जिनमें से ‘अलीगढ़’, ‘आय...

अब्बास कैरोस्तमी: सिनेमा का कवि: यादवेंद्र

अब्बास कैरोस्तमी: सिनेमा का कवि: यादवेंद्र

अब्बास कैरोस्तमी को ईरान का आधुनिक सूफी कहा गया जिसके रंग उनकी फिल्मों में बिखरें हैं, पाबंदियों  के बीच आज़ाद. लेखक-अनुवादक यादवेंद्र ने उनके व्यक्तित्व के कुछ आयाम यहाँ प्रस्तुत...

सिनेमा का सौन्दर्य-शास्त्र: रिज़वानुल हक़

सिनेमा विश्व की आधुनिक और सबसे लोकप्रिय विधा है. उसमें लगभग सभी ललित कलाओं  का समावेश हो जाता है,   अभिनय, कथा, कविता, गायन, वादन, वासक-सज्जा, केश-सज्जा आदि आदि और वह...

पाकीज़ा के प्रतीक: जितेन्द्र विसारिया

फ़िल्म पाकीज़ा हिंदी सिनेमा के संवेदनशील अंकन, भावप्रवण अभिनय और कलात्मक दृश्य-विधान का उत्कर्ष है, इसमें किसी महाकाव्य जैसी गहराई है. पतनशील सामन्ती संस्कृति के मुहाने पर खड़ी नृत्य, संगीत...

शशि कपूर, लता मंगेशकर और कपिल शर्मा: हरि मृदुल

  हरि मृदुल ने ‘अमर उजाला’ के मुंबई ब्यूरो में विशेष संवाददाता रहते हुए चमकती फिल्मी दुनिया के अँधेरे और टूटन को भी करीब से देखा है, उनकी ये तीनों कहानियाँ...

साधना : मुलाक़ात हो न हो : प्रवीण प्रणव

अभिनेत्री साधना के जीवन पर आधारित प्रबोध कुमार गोविल की किताब ‘ज़बाने यार मनतुर्की’ का प्रकाशन बोधि ने किया है. प्रवीण प्रणव ने इसकी अच्छी समीक्षा लिखी है. पुस्तक : ज़बाने...

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