असंगतियों, अन्याय एवं अनाचार के विरोध का तरीका अंततः समाज ही विकसित करता है और उसका निरंतर अभ्यास भी करता...
समालोचन पर ही आपने विनोद कुमार शुक्ल की अंतिम कविता पढ़ी, ‘कृति’ में पहली बार प्रकाशित उनकी कविताएँ भी. यह...
लेखक जब संपादक भी हो जाता है तब संपादन की ज़िम्मेदारी उसके लेखन पर दो तरह से असर डालती है....
वर्तमान संकटों और चुनौतियों के बीच विचार की भूमिका केवल व्याख्याकार की नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व वहन करने वाली नैतिक चेतना...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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