संगीत

प्रोतिमा बेदी : उसने लास्य चुना और चुना प्रेम: रंजना मिश्रा

प्रोतिमा बेदी : उसने लास्य चुना और चुना प्रेम: रंजना मिश्रा

लेख ‘अमूर्तन का आलाप’ में रंजना मिश्र ने यह रेखांकित किया था कि प्रोतिमा बेदी के जीवन में पंडित जसराज अमूल्य और दुर्लभ धरोहर थे. ख़ुद प्रोतिमा नृत्य की दुनिया...

देवदासी : समाज और संस्कृति : गरिमा श्रीवास्तव

वाल्टर बेन्यामिन का यह कथन कि ‘सभ्यता का इतिहास बर्बरता का भी इतिहास है’ स्त्री के सन्दर्भ में सच के बहुत निकट है. मंदिर भक्ति और अध्यात्म के साथ-साथ ज्ञान...

उस्ताद अब्दुल करीम खाँ और किराना घराना : पंकज पराशर

(उस्ताद अब्दुल करीम खाँ)इधर हिंदी में साहित्य के अलावा पेंटिंग, नाटक, शास्त्रीय-संगीत, नृत्य आदि की तरफ भी लेखकों और आलोचकों का ध्यान गया है, वे शोध और संवेदनशीलता के साथ...

शायद कि याद भूलने वाले ने फिर किया : पंकज पराशर

शायद कि याद भूलने वाले ने फिर किया : पंकज पराशर

जो कोठे कभी कला के आश्रय तथा केंद्र और स्त्रियों की  स्वाधीन के प्रक्षेत्र थे, उन्हें औपनिवेशिक शासन ने सिर्फ देह पर आश्रित रहने के लिए मजबूर कर दिया, उन्हें...

मोहम्मद रफ़ी : तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे : सुशील कृष्ण गोरे

३१ जुलाई १९८० को महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी हमसे हमेशा के लिए अलग हो गये, पर इस महाद्वीप में आज भी उनकी आवाज़ गूंजती रहती है. उन्हें याद कर...

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