अनुवाद

द गर्ल फ्रॉम इपनेमा (1963/1982) : हारुकी मुराकामी: प्रभात रंजन

द गर्ल फ्रॉम इपनेमा (1963/1982) : हारुकी मुराकामी: प्रभात रंजन

हारुकी मुराकामी की यह कहानी प्रसिद्ध ब्राज़ीलियन गीत ‘द गर्ल फ्रॉम इपनेमा’ से प्रेरित है. संगीतकार अंतोनियो कार्लोस जोबिम ने इसे रियो द जेनेरो के ‘इपनेमा’ समुद्रतट पर रोज़ गुजरने...

काटेरीना कालिट्को की कविताएँ : अनुवाद : तेजी ग्रोवर

काटेरीना कालिट्को की कविताएँ : अनुवाद : तेजी ग्रोवर

असंगतियों, अन्याय एवं अनाचार के विरोध का तरीका अंततः समाज ही विकसित करता है और उसका निरंतर अभ्यास भी करता रहता है. राजनीति अपना कार्य करती है, साहित्य अपना. राजनीति...

लास्लो क्रास्नाहोर्काई का नोबेल व्याख्यान : अनुवाद: राकेश कुमार मिश्र

लास्लो क्रास्नाहोर्काई का नोबेल व्याख्यान : अनुवाद: राकेश कुमार मिश्र

लास्लो क्रास्नाहोरकाई का 7 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम में दिया गया नोबेल-व्याख्यान आधुनिकता की उस थकान का सघन दस्तावेज़ है, जो अब केवल सामाजिक या राजनीतिक संकट भर नहीं रह...

रिडिप्लॉयमेंट : फिल क्ले : अनुवाद: आयशा आरफ़ीन

रिडिप्लॉयमेंट : फिल क्ले : अनुवाद: आयशा आरफ़ीन

फिल क्ले की कहानी ‘Redeployment’ युद्ध से लौटे एक सैनिक के अनुभवों पर केंद्रित है. यह कहानी केवल सैनिक जीवन के बाहरी वृत्त तक सीमित नहीं रहती; बल्कि घर लौटने...

रोज़े औसलेण्डर : अनुवाद: रुस्तम सिंह

रोज़े औसलेण्डर : अनुवाद: रुस्तम सिंह

यहूदी कवयित्री और अनुवादक रोज़ आउसलैंडर (1901–1988) की कविताएँ स्मृति और आघात के संगम पर खड़ी हैं; यही तनाव उनके लेखन को एक अनोखी दीप्ति प्रदान करता है. यह एक...

दीवान-ए-जानवरी : अरुण खोपकर

दीवान-ए-जानवरी : अरुण खोपकर

अभिनेता, निर्देशक, सिने-विद्, लेखक और अनुवादक 79 वर्षीय अरुण खोपकर का जानवरों पर लिखा गया यह अंश अद्भुत और अनूठा है. पशुओं पर लेखन वैसे भी हिंदी और अन्य भारतीय...

एक संजीदा डिटेक्टिव-स्टोरी : असद मोहम्मद ख़ान

एक संजीदा डिटेक्टिव-स्टोरी : असद मोहम्मद ख़ान

किसी देश और उसके समाज का आईना देखना हो तो उर्दू के मशहूर कथाकार असद मोहम्मद ख़ान की कहानी ‘संजीदा डिटेक्टिव-स्टोरी’ अवश्य पढ़नी चाहिए. 1972 में प्रकाशित यह कहानी पाकिस्तान...

बोर्हेस के सान्निध्य में : जयप्रकाश सावंत

बोर्हेस के सान्निध्य में : जयप्रकाश सावंत

वरिष्ठ लेखक और अनुवादक जयप्रकाश सावंत ने स्पेनिश भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार बोर्हेस (1899–1986) के सान्निध्य और साहित्य पर कुछ इस तरह से लिखा है कि आधुनिक साहित्य का क्लासिक...

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