मूसा-ए-दिगर : मजीद क़ैसरी : अनुवाद: अक्षत जैन
प्रसिद्ध समकालीन ईरानी कथाकार मजीद क़ैसरी की कहानी ‘मूसा-ए-दिगर’ विस्मित करती है. इतने कम शब्दों में कितना बड़ा समय इसने समेट रखा है. कहने के अंदाज़ का क्या कहना. इतना...
प्रसिद्ध समकालीन ईरानी कथाकार मजीद क़ैसरी की कहानी ‘मूसा-ए-दिगर’ विस्मित करती है. इतने कम शब्दों में कितना बड़ा समय इसने समेट रखा है. कहने के अंदाज़ का क्या कहना. इतना...
1982 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज़ से बार-बार पूछा जाता था कि वे उपन्यास कैसे लिखते हैं. 25 जनवरी 1984 को लिखा गया...
मनुष्य की मुक्ति कहाँ है. जीवित भर रहने में या सृजन में. होर्खे लुई बोर्खेस की 1943 में लिखी कहानी ‘The Secret Miracle’ एक ओर कलाकारों पर सत्ता की अमानवीयता...
अंग्रेजी रोमांटिक कविता आंदोलन के प्रमुख कवि शेली का निबंध ‘A Defence of Poetry’, जो 1821 में लिखा गया था और जो उनकी मृत्यु के बाद 1840 में प्रकाशित हुआ,...
यूनुस एमरे (1238–1320) तुर्की और समूची सूफ़ी परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम, विरह, धर्म और मनुष्यता अत्यंत मार्मिक और गहरे रूप में...
हारुकी मुराकामी की यह कहानी प्रसिद्ध ब्राज़ीलियन गीत ‘द गर्ल फ्रॉम इपनेमा’ से प्रेरित है. संगीतकार अंतोनियो कार्लोस जोबिम ने इसे रियो द जेनेरो के ‘इपनेमा’ समुद्रतट पर रोज़ गुजरने...
असंगतियों, अन्याय एवं अनाचार के विरोध का तरीका अंततः समाज ही विकसित करता है और उसका निरंतर अभ्यास भी करता रहता है. राजनीति अपना कार्य करती है, साहित्य अपना. राजनीति...
लास्लो क्रास्नाहोरकाई का 7 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम में दिया गया नोबेल-व्याख्यान आधुनिकता की उस थकान का सघन दस्तावेज़ है, जो अब केवल सामाजिक या राजनीतिक संकट भर नहीं रह...
फिल क्ले की कहानी ‘Redeployment’ युद्ध से लौटे एक सैनिक के अनुभवों पर केंद्रित है. यह कहानी केवल सैनिक जीवन के बाहरी वृत्त तक सीमित नहीं रहती; बल्कि घर लौटने...
यहूदी कवयित्री और अनुवादक रोज़ आउसलैंडर (1901–1988) की कविताएँ स्मृति और आघात के संगम पर खड़ी हैं; यही तनाव उनके लेखन को एक अनोखी दीप्ति प्रदान करता है. यह एक...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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