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2025 में जब लास्लो क्रास्नाहोर्काई को नोबेल पुरस्कार मिला, तब उनके उपन्यास Satantango पर आधारित बेला तार की लगभग सात...
Read moreDetailsमहान कलाओं का स्थायी आकर्षण उनकी बहुस्तरीय संरचना में निहित होता है. वे न तो किसी एक क्षण में पूरी...
Read moreDetailsसाहित्य के साथ संगीत, नृत्य, चित्रकला, शिल्प, फ़िल्म और रंगमंच जैसी कलाएँ मिलकर किसी समाज की सहृदयता और सांस्कृतिक परिपक्वता...
Read moreDetailsअचल मिश्रा द्वारा 2024 में निर्देशित वृत्तचित्र ‘चार फूल हैं और दुनिया है’ विनोद कुमार शुक्ल के जीवन और लेखन...
Read moreDetailsक्या आप भारतीय सिनेमा की पहली दलित अभिनेत्री पी.के. रोजी को जानते हैं, जिनका नाम उपेक्षा के हाशिये में विलुप्त...
Read moreDetailsमहान अकीरा कुरोसावा की 1952 की क्लासिक फ़िल्म इकिरू (Ikiru) मनुष्य के अस्तित्व और उसकी सार्थकता के प्रश्न को बेहद...
Read moreDetailsअंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित पाकिस्तानी फ़िल्ममेकर जवाद शरीफ़ की निर्देशित एवं निर्मित डॉक्यूमेंट्री ‘इंडस ब्लूज़’ (2018) संकटग्रस्त लोक-संगीत और विलुप्ति...
Read moreDetailsरज़ा की कलाकृतियों को देखना ही नहीं, उनके बारे में पढ़ना भी सम्मोहक अनुभव है. यशोधरा डालमिया की ‘सैयद हैदर...
Read moreDetailsऋत्विक घटक (1925–1976) की जन्मशती के अवसर पर आलोचक रविभूषण का आलेख आप यहीं पढ़ चुके हैं. निर्देशक–लेखक अरुण खोपकर...
Read moreDetailsरतन थियम का जाना रंगमंच के एक युग का अवसान है. मंचन में वे कल्पनाशीलता की पराकाष्ठा थे. सम्मोहक शब्द...
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समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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