कविता

प्रियंका दुबे की कविताएँ

प्रियंका दुबे की कविताएँ

‘तुम्हारे साथ इतनी सुखी हूँ मैं /कि अब मेरे इस सुख से भी /ग्लानि का तीर झाँकने लगा है…’ वह रिक्त में आती है पर जब आप भरे हों. आकंठ....

माँ के लिए ग्यारह कविताएँ: तेजी ग्रोवर

माँ के लिए ग्यारह कविताएँ: तेजी ग्रोवर

वरिष्ठ कवयित्री,कथाकार और अनुवादक तेजी ग्रोवर की ‘नी मेरिए माँएँ’ शीर्षक से प्रकाशित माँ के लिए ग्यारह कविताएँ पढ़ते हुए पहली प्रतिक्रिया आँखें देती हैं. फफकती हुई रुलाई कोरों पर...

आमिर हमज़ा की कविताएँ

आमिर हमज़ा की कविताएँ

आमिर हमज़ा की प्रस्तुत कविताएँ उनके कवि व्यक्तित्व को और पुख़्ता करती हैं. कविता की सूक्ष्मता का निर्वाह है. आंतरिक लय से च्युत नहीं होती इन कविताओं का रकबा बड़ा...

अमित तिवारी की कविताएँ

अमित तिवारी की कविताएँ

अमित तिवारी कविताएँ लिखते हैं. अनुवाद करते हैं. उनकी कविताओं ने ध्यान खींचा है. उनकी कुछ नई कविताएँ प्रस्तुत हैं.

नवीन रांगियाल

नवीन रांगियाल

फरवरी का महीना है. फाल्गुन मास. वसंत और उसके उत्सव का महीना. प्रेम के मनुहार का उज्ज्वल पक्ष. स्त्री से अधिक सुंदर इस धरती पर कुछ भी नहीं. उसका होना...

लवली गोस्वामी की कविताएँ

लवली गोस्वामी की कविताएँ

लवली गोस्वामी का पहला कविता संग्रह 2019 में “उदासी मेरी मातृभाषा है” शीर्षक से प्रकाशित हुआ था जिसे 2022 का केदारनाथ स्मृति सम्मान मिला है. उनकी कुछ नयी कविताएँ प्रस्तुत...

अयोध्या में कालपुरुष! : बोधिसत्व

अयोध्या में कालपुरुष! : बोधिसत्व

महानायकों का जीवन ही नहीं अवसान भी काव्य जैसा होता है. वे असाधारण मृत्यु के लिए अभिशप्त हैं. बीसवीं सदी की निराशा को निराला ने ‘राम की शक्ति पूजा में’...

अशोक वाजपेयी: कुछ और कविताएँ

अशोक वाजपेयी: कुछ और कविताएँ

कहना न होगा कि आज हिंदी क्षेत्र की सांस्कृतिक साक्षरता और समृद्धि के लिए साहित्य, कला और विचार के क्षेत्र में काम करने वाले सैकड़ों दृष्टि सम्पन्न नवोन्मेषी प्रतिभाओं की...

गोरखनाथ की ‘सबदी’ का कायांतरण : बोधिसत्व

गोरखनाथ की ‘सबदी’ का कायांतरण : बोधिसत्व

हिंदी कविता की जड़े देखनी हो तो सिद्धों-नाथों की कविताओं को पढ़ना चाहिए. गहरी और फैली हुईं. ख़ासकर गोरखनाथ को. यहीं से भक्तिकाल की ज़मीन तैयार हुई जिसमें कबीर जैसा...

कौशलेन्द्र की कविताएँ

कौशलेन्द्र की कविताएँ

कविता का कार्य सूचित करना नहीं अर्थ देना है. कौशलेन्द्र की कविता-यात्रा में इसे देखा जा सकता है. बताने से अधिक वह दिखाने की और अग्रसर हैं. उनकी कविताएँ पढ़ते...

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