दर्शन

भारतीय यथार्थवाद: विनोद शाही  

भारतीय यथार्थवाद: विनोद शाही  

विनोद शाही सच्चे अर्थों में चिंतक-लेखक हैं. उनकी आलोचना दृष्टि में साहित्य, समाज और उनसे जुड़ी विचारधाराओं की गत्यात्मकता की बड़ी भूमिका रहती है. प्रस्तुत लेख एक तरह से भारतीय...

नैतिक दृष्टियाँ और पुरुषार्थ:   प्रचण्ड प्रवीर

नैतिक दृष्टियाँ और पुरुषार्थ: प्रचण्ड प्रवीर

प्रचण्ड प्रवीर हिंदी के उन दुर्लभ कथाकारों में से एक हैं जो दर्शन में रूचि और गति रखते हैं. रस सिद्धांत पर उनकी एक किताब प्रकाशित है. भारतीय दर्शन में...

स्मृति: यशदेव शल्य: रमेशचंद्र शाह

स्मृति: यशदेव शल्य: रमेशचंद्र शाह

  यशदेव शल्य (26 जून,1928- 31 जनवरी, 2021) हिन्दी में लिखने वाले विश्वस्तरीय मौलिक दार्शनिक थे.  आधुनिक दार्शनिकों में यशदेव शल्य इस अर्थ ने अद्भुत थे कि उन्होंने दर्शन की कहीं...

मीमांसा : स्पिनोज़ा – दर्शन और अनुवाद : प्रत्यूष पुष्कर

कार्टून- डेविड लेविनयहूदी मूल के महान डच दार्शनिक स्पिनोज़ा (२४ नवम्बर १६३२ : २१ फ़रवरी १६७७) की कृतियों का हिन्दी में  समुचित अनुवाद हो और सम्बन्धित दार्शनिक प्रत्ययों पर उचित...

एडोर्नो: अच्युतानंद मिश्र

एडोर्नो: अच्युतानंद मिश्र

एडोर्नो (Theodor W. Adorno, September 11, 1903 – August 6, 1969) बीसवीं सदी के प्रसिद्ध दार्शनिक, समाज-वैज्ञानिक और संस्कृति- आलोचक हैं. वे ऐसे शायद पहले विचारक हैं जिन्होंने दर्शन और संगीत...

बौद्रिला: अच्युतानंद मिश्र

बौद्रिला: अच्युतानंद मिश्र

फ़्रांसिसी दार्शनिक बौद्रिला (Jean Baudrillard,  27 July 1929 – 6 March 2007) बीसवीं शताब्दी के महत्वपूर्ण चिंतकों में शामिल हैं, खासकर उत्तर-आधुनिकता और उपभोक्तवाद को समझने के लिए उन्हें जरुर...

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