समीक्षा

जब से आँख खुली है : अनूप सेठी

जब से आँख खुली है : अनूप सेठी

हिन्दी के वरिष्ठ कवि-लेखक लीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ निजी जीवन-कथा से आगे बढ़कर छिन्दवाड़ा और दमुआ के बार-बार उजड़ते श्रमिक जीवन, अस्थिर रोज़गार, अभावग्रस्त बुनियादी...

गणराज्य का स्वधर्म : कुँवर प्रांजल सिंह

गणराज्य का स्वधर्म : कुँवर प्रांजल सिंह

राजनीति विज्ञानी, सामाजिक कार्यकर्ता और ‘भारत जोड़ो अभियान’ के राष्ट्रीय संयोजक योगेन्द्र यादव की इसी वर्ष प्रकाशित पुस्तक ‘गणराज्य का स्वधर्म’ यूरोपीय मॉडल के एकरूपी राष्ट्रवाद के बरक्स भारत के...

घर जाते : पवन करण

घर जाते : पवन करण

गुलाममोहम्मद शेख (1937, सुरेंद्रनगर, गुजरात) केवल चित्रकार ही नहीं, बल्कि कला-चिंतक और लेखक भी हैं. उनकी चित्रकला की बहुस्तरीय कथात्मकता में विभिन्न समय, स्थान और सांस्कृतिक संदर्भ एक साथ उपस्थित...

नये घर में अम्मा : आशुतोष

नये घर में अम्मा : आशुतोष

कथाकार योगिता यादव का तीसरा कहानी-संग्रह, ‘नये घर में अम्मा’ सेतु प्रकाशन से छप कर आया है जिसमें आठ कहानियाँ शामिल हैं. इन कहानियों की ख़ूबियों और ख़ामियों की चर्चा...

नूह का कबूतर : विपिन शर्मा

नूह का कबूतर : विपिन शर्मा

आमिर हमज़ा अच्छे कवि तो हैं ही, संकलन और संपादन में भी कल्पनाशील हैं. हिंदी, उर्दू और फ़ारसी के 25 लेखकों से उन्होंने उनके प्रिय पात्रों पर ख़त लिखवाए हैं....

नॉरवेजियन वुड : पवन करण

नॉरवेजियन वुड : पवन करण

हारुकी मुराकामी का उपन्यास ‘नॉरवेजियन वुड’ मूल जापानी भाषा में 1987 में प्रकाशित हुआ था. इसका अंग्रेज़ी अनुवाद जे. रूबीन ने 2000 में किया. अब यह वरिष्ठ लेखक-अनुवादक मदन सोनी...

आशंकाओं के द्वीप में लघु मानव  : मयंक

आशंकाओं के द्वीप में लघु मानव : मयंक

युवा आलोचक आनन्द पाण्डेय को उनकी आलोचना-पुस्तक ‘आशंकाओं के द्वीप में लघुमानव’ के लिए वर्ष 2025 का देवीशंकर अवस्थी सम्मान देने का निर्णय लिया गया है. यह सम्मान हर वर्ष...

भक्ति अगाध अनंत : एकता मंडल

भक्ति अगाध अनंत : एकता मंडल

वरिष्ठ आलोचक माधव हाड़ा इधर वर्षों से मध्यकालीन-साहित्य पर कार्य कर रहे हैं. ‘भक्ति अगाध अनंत ‘ उनकी एक महत्वाकांक्षी पुस्तक है, जिसमें भक्ति आंदोलन के अखिल भारतीय परिदृश्य को...

भारत : एक विचार परंपरा : कुँवर प्रांजल सिंह

भारत : एक विचार परंपरा : कुँवर प्रांजल सिंह

भक्ति काल की साझी स्मृति, स्वाधीनता संघर्ष और नवजागरण की खुली समझ से निर्मित भारतीयता पर जैसे-जैसे संगठित हमले बढ़ रहे हैं, उसी अनुपात में उसे फिर से सहेजने और...

मैं बरबाद होना चाहती हूँ : रीना सिंह

मैं बरबाद होना चाहती हूँ : रीना सिंह

मलिका अमर शेख की आत्मकथा ‘मला उद्ध्वस्त व्हायचंय’ का हिंदी अनुवाद राजकमल ने प्रकाशित किया है, जिसमें उनके वैवाहिक जीवन की यातनाएँ और कवि-राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में नामदेव ढसाल...

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