समीक्षा

खेल-खेल में बीता जीवन : गिरीश कारनाड

खेल-खेल में बीता जीवन : गिरीश कारनाड

सजग सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश कारनाड भारत में आधुनिक नाटक और रंगमंच के अग्रदूतों में रहे हैं. इसके साथ ही वे समानांतर सिनेमा के भी एक मजबूत स्तंभ थे. उनके द्वारा...

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: हाशिये का समाज और हिंदी उपन्यास : महेश मिश्र

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: हाशिये का समाज और हिंदी उपन्यास : महेश मिश्र

इसी वर्ष लोकभारती से प्रकाशित पुस्तक ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: हाशिये का समाज और हिंदी उपन्यास’ न केवल रोहिणी अग्रवाल के आलोचना-कर्म का एक महत्त्वपूर्ण अग्रिम पड़ाव है, बल्कि हिंदी आलोचना में...

कुन फ़यकुन : दीपक त्रिपाठी

कुन फ़यकुन : दीपक त्रिपाठी

बतौर कवि आमिर हमज़ा वर्षों से पढ़े और सराहे जा रहे हैं. उनके संग्रह ने उन्हें एक साथ पढ़ने की सुविधा भी दे दी है. उनका पहला संग्रह ‘कुन फ़यकुन’...

स्मृति और दंश : विभाजन, निरंतरता और तीसरी पीढ़ी : कुँवर प्रांजल सिंह

स्मृति और दंश : विभाजन, निरंतरता और तीसरी पीढ़ी : कुँवर प्रांजल सिंह

इतिहास विभाजन, विस्थापन और निर्वासन के घावों से भरा पड़ा है. इनकी गुम चोटों की शिनाख्त की कोशिशें इसलिए ज़रूरी हैं कि इन्हें फिर से दोहराया न जाए. बलवंत कौर...

इक्कीस एक सौ बाईस : मुहम्मद रैहान

इक्कीस एक सौ बाईस : मुहम्मद रैहान

मृत्यु और अस्तित्व के इर्दगिर्द घूमते ख़ालिद जावेद के उपन्यास ‘इक्कीस एक सौ बाईस’ का प्रकाशन रेख़्ता ने किया है. यह उनका पाँचवाँ उपन्यास है. उनके उपन्यास नेमत ख़ाना के...

अपनी धुन में रस्किन बांड :  पवन करण

अपनी धुन में रस्किन बांड : पवन करण

भारतीय अंग्रेज़ी लेखन में रस्किन बॉन्ड सुपरिचित नाम हैं. पीढ़ियाँ उन्हें पढ़ते हुए बड़ी हुई हैं. 92 वर्षीय इस लेखक की अंग्रेज़ी में लिखी आत्मकथा ‘Lone Fox Dancing’ का हिंदी...

लेडीज़ कूपे : पवन करण

लेडीज़ कूपे : पवन करण

अनीता नायर की लेडीज़ कूपे, एक ऐसी स्त्री की यात्रा-कथा है जो ख़ुद की तलाश में निकली है और ट्रेन के लेडीज़ कूपे में पाँच अलग-अलग महिलाओं से मिलती है...

‘रंगयात्रियों के राहे गुज़र’ से गुजरते हुए : विजय पण्डित

‘रंगयात्रियों के राहे गुज़र’ से गुजरते हुए : विजय पण्डित

सत्यदेव त्रिपाठी की संस्मरणात्मक पुस्तक 'रंग यात्रियों के राहे गुज़र' में डॉ. श्रीराम लागू, ए. के. हंगल, हबीब तनवीर, सत्यदेव दुबे, बंसी कौल, दिनेश ठाकुर, अरुण पांडेय और विजय कुमार...

उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें :  कुँवर प्रांजल सिंह

उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें : कुँवर प्रांजल सिंह

हिंदी में मौलिक सामाजिक‑राजनीतिक विषयों पर स्तरीय पुस्तकें लगातार प्रकाशित हो रही हैं. साथ ही महत्वपूर्ण अनूदित कृतियाँ भी सामने आ रही हैं. हिंदी समाज के बौद्धिक विकास के लिए...

नये शेखर की जीवनी (आगमन और प्रस्थान) : राकेश कुमार मिश्र

नये शेखर की जीवनी (आगमन और प्रस्थान) : राकेश कुमार मिश्र

कवि-संपादक अविनाश मिश्र के उपन्यास ‘नये शेखर की जीवनी’ का पहला हिस्सा 2018 में प्रकाशित हुआ था और इसने अपने कथानक तथा शिल्प से ध्यान खींचा था. पिछले वर्ष इसका...

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