‘रंगयात्रियों के राहे गुज़र’ से गुजरते हुए : विजय पण्डित
सत्यदेव त्रिपाठी की संस्मरणात्मक पुस्तक 'रंग यात्रियों के राहे गुज़र' में डॉ. श्रीराम लागू, ए. के. हंगल, हबीब तनवीर, सत्यदेव दुबे, बंसी कौल, दिनेश ठाकुर, अरुण पांडेय और विजय कुमार...
सत्यदेव त्रिपाठी की संस्मरणात्मक पुस्तक 'रंग यात्रियों के राहे गुज़र' में डॉ. श्रीराम लागू, ए. के. हंगल, हबीब तनवीर, सत्यदेव दुबे, बंसी कौल, दिनेश ठाकुर, अरुण पांडेय और विजय कुमार...
हिंदी में मौलिक सामाजिक‑राजनीतिक विषयों पर स्तरीय पुस्तकें लगातार प्रकाशित हो रही हैं. साथ ही महत्वपूर्ण अनूदित कृतियाँ भी सामने आ रही हैं. हिंदी समाज के बौद्धिक विकास के लिए...
कवि-संपादक अविनाश मिश्र के उपन्यास ‘नये शेखर की जीवनी’ का पहला हिस्सा 2018 में प्रकाशित हुआ था और इसने अपने कथानक तथा शिल्प से ध्यान खींचा था. पिछले वर्ष इसका...
फ़ैसल अलक़ाज़ी की पुस्तक ‘अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार की यादें’ का हिंदी अनुवाद राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. अमितेश कुमार द्वारा अनूदित यह पुस्तक भारतीय आधुनिक रंगमंच के इतिहास, उसके सांस्कृतिक...
‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ 71 वर्षीय रुस्तम का नवीनतम कविता-संग्रह है, जो प्रेम पर केन्द्रित है. मिनिमलिस्ट शैली के वे अपनी तरह के अप्रतिम कवि हैं, और यह प्रेम-पथ...
‘काग़ज़ के प्रदेश में’, ‘चुप्पी का शोर’, ‘योजनाओं का शहर’ और ‘तनी हुई रस्सी पर’ के बाद ‘घेराबंदी और अन्य कविताएँ’ कवि-संपादक संजय कुंदन का नया कविता-संग्रह है, जिसे सेतु...
अंतिका प्रकाशन से प्रकाशित कथाकार उर्मिला शिरीष की पुस्तक ‘पच्चीस कहानियाँ’ की चर्चा कर रहे हैं वरिष्ठ लेखक प्रकाश कान्त.
केतन यादव के पहले कविता-संग्रह, ‘एक चरवाहे का गीत’ की चर्चा कर रहे हैं महेश कुमार. इसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रकाशित किया है. केतन यादव की कविताएँ...
पिछले दिनों ‘द हिंदू’ से जुड़े पत्रकार एस आर प्रवीण की पुस्तक ‘Ticket to Kerala: The Story of Malayalam Cinema प्रकाशित हुई है. लोकप्रियता और कलात्मकता के बीच लगातार संतुलन...
इतिहासकार और सबाल्टर्न-अध्ययन परियोजना के संस्थापक सदस्यों में शामिल ज्ञानेंद्र पांडेय की पुस्तक ‘Men at Home’ में कुछ प्रसिद्ध भारतीय पुरुषों के पतिपन का विश्लेषण किया गया है. यह पुस्तक...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum