समीक्षा

अपनी धुन में रस्किन बांड :  पवन करण

अपनी धुन में रस्किन बांड : पवन करण

भारतीय अंग्रेज़ी लेखन में रस्किन बॉन्ड सुपरिचित नाम हैं. पीढ़ियाँ उन्हें पढ़ते हुए बड़ी हुई हैं. 92 वर्षीय इस लेखक की अंग्रेज़ी में लिखी आत्मकथा ‘Lone Fox Dancing’ का हिंदी...

लेडीज़ कूपे : पवन करण

लेडीज़ कूपे : पवन करण

अनीता नायर की लेडीज़ कूपे, एक ऐसी स्त्री की यात्रा-कथा है जो ख़ुद की तलाश में निकली है और ट्रेन के लेडीज़ कूपे में पाँच अलग-अलग महिलाओं से मिलती है...

‘रंगयात्रियों के राहे गुज़र’ से गुजरते हुए : विजय पण्डित

‘रंगयात्रियों के राहे गुज़र’ से गुजरते हुए : विजय पण्डित

सत्यदेव त्रिपाठी की संस्मरणात्मक पुस्तक 'रंग यात्रियों के राहे गुज़र' में डॉ. श्रीराम लागू, ए. के. हंगल, हबीब तनवीर, सत्यदेव दुबे, बंसी कौल, दिनेश ठाकुर, अरुण पांडेय और विजय कुमार...

उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें :  कुँवर प्रांजल सिंह

उपनिवेश : सांस्कृतिक अन्याय को कैसे समझें : कुँवर प्रांजल सिंह

हिंदी में मौलिक सामाजिक‑राजनीतिक विषयों पर स्तरीय पुस्तकें लगातार प्रकाशित हो रही हैं. साथ ही महत्वपूर्ण अनूदित कृतियाँ भी सामने आ रही हैं. हिंदी समाज के बौद्धिक विकास के लिए...

नये शेखर की जीवनी (आगमन और प्रस्थान) : राकेश कुमार मिश्र

नये शेखर की जीवनी (आगमन और प्रस्थान) : राकेश कुमार मिश्र

कवि-संपादक अविनाश मिश्र के उपन्यास ‘नये शेखर की जीवनी’ का पहला हिस्सा 2018 में प्रकाशित हुआ था और इसने अपने कथानक तथा शिल्प से ध्यान खींचा था. पिछले वर्ष इसका...

अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार का  ज़िन्दगीनामा : पवन करण

अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार का ज़िन्दगीनामा : पवन करण

फ़ैसल अलक़ाज़ी की पुस्तक ‘अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार की यादें’ का हिंदी अनुवाद राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. अमितेश कुमार द्वारा अनूदित यह पुस्तक भारतीय आधुनिक रंगमंच के इतिहास, उसके सांस्कृतिक...

एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी : निशांत उपाध्याय

एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी : निशांत उपाध्याय

‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ 71 वर्षीय रुस्तम का नवीनतम कविता-संग्रह है, जो प्रेम पर केन्द्रित है. मिनिमलिस्ट शैली के वे अपनी तरह के अप्रतिम कवि हैं, और यह प्रेम-पथ...

घेराबंदी और अन्य कविताएँ: फ़रीद ख़ाँ

घेराबंदी और अन्य कविताएँ: फ़रीद ख़ाँ

‘काग़ज़ के प्रदेश में’, ‘चुप्पी का शोर’, ‘योजनाओं का शहर’ और ‘तनी हुई रस्सी पर’ के बाद ‘घेराबंदी और अन्य कविताएँ’ कवि-संपादक संजय कुंदन का नया कविता-संग्रह है, जिसे सेतु...

एक चरवाहे का गीत : महेश कुमार

एक चरवाहे का गीत : महेश कुमार

केतन यादव के पहले कविता-संग्रह, ‘एक चरवाहे का गीत’ की चर्चा कर रहे हैं महेश कुमार. इसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रकाशित किया है. केतन यादव की कविताएँ...

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