समीक्षा

खोई चीज़ों का शोक: राजाराम भादू

खोई चीज़ों का शोक: राजाराम भादू

‘खोई चीज़ों का शोक’ (2021) सविता सिंह का चौथा कविता-संग्रह है. 2001 में उनका पहला संग्रह ‘अपने जैसा जीवन’ प्रकाशित हुआ था. इन बीस वर्षों में उनकी कविता के साथ-साथ...

वारसा डायरी: गरिमा श्रीवास्तव

वारसा डायरी: गरिमा श्रीवास्तव

वरिष्ठ आलोचक-लेखक रवि रंजन की पोलैंड की राजधानी वारसा प्रवास की साक्षी यह ‘वारसा डायरी’ संस्मरण और डायरी लेखन के एक दूसरे में घुल मिल जाने का आत्मीय प्रयोग है....

टीआरपी के चक्र में टीवी:अरविंद दास

टीआरपी के चक्र में टीवी:अरविंद दास

समझ में नहीं आता कि माध्यम को दोष दिया जाए कि जिनके हाथों में वह है उन्हें. टीवी की शुरुआत भारत में कितनी उम्मीदों के साथ हुई थी, पत्रकारिता को...

नदी पुत्र: उत्तर भारत में निषाद और नदी : सौरव कुमार राय

नदी पुत्र: उत्तर भारत में निषाद और नदी : सौरव कुमार राय

रमाशंकर सिंह की पुस्तक ‘नदी पुत्र: उत्तर भारत में निषाद और नदी’ निषादों की नदी पर निर्भरता के साथ-साथ समाज में उनकी उपस्थिति और राजनीतिक गतिशीलता को भी देखती है....

उपशीर्षक: सारंग उपाध्याय

उपशीर्षक: सारंग उपाध्याय

कुमार अम्बुज हिंदी के महत्वपूर्ण कवि हैं, इस वर्ष आया उनका नया कविता संग्रह- ‘उपशीर्षक’ हिंदी कविता में रेखांकित करने वाली घटना है, इस दशक की मनोदशा का दर्पण है....

पत्रकार की खोजी यात्राएँ: सुधांशु गुप्त

पत्रकार की खोजी यात्राएँ: सुधांशु गुप्त

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश का यात्रा-संस्मरण ‘मेम का गाँव गोडसे की गली’ संभावना प्रकाशन से इसी वर्ष प्रकाशित हो कर आया है और अपनी खोजी दृष्टि और सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों...

हिन्दनामा: महाकाव्यात्मक  ऐतिहासिकता:  हेतु भारद्वाज

हिन्दनामा: महाकाव्यात्मक ऐतिहासिकता: हेतु भारद्वाज

कृष्ण कल्पित का कविता संग्रह- ‘एक महादेश की गाथा: हिन्दनामा’ २०१९ में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ था और तभी से रुचि का विषय बना हुआ है. मिथकों, पुराख्यानों और...

हरीश त्रिवेदी के ‘रहीम’: सुजीत कुमार सिंह

हरीश त्रिवेदी के ‘रहीम’: सुजीत कुमार सिंह

सुजीत कुमार सिंह हिंदी नवजागरणकालीन साहित्य के अध्येता हैं. हरीश त्रिवेदी द्वारा संपादित, ‘अब्दुर्रहीम ख़ानेख़ाना: काव्य-सौन्दर्य और सार्थकता’ को परखते हुए उनकी नज़र प्रारम्भिक पत्र-पत्रिकाओं में छपी सामग्री पर भी...

किन्नर: संघर्ष से स्वीकार्यता तक: यतीश कुमार

किन्नर: संघर्ष से स्वीकार्यता तक: यतीश कुमार

वाणी प्रकाशन से २०२१ में प्रियंका नारायण की पुस्तक ‘किन्नर: सेक्स और सामाजिक स्वीकार्यता’ प्रकाशित हुई है. प्रियंका ने किन्नरों की लैंगिक अवधारणा तथा जीव-वैज्ञानिक अध्ययन के साथ ही पुराण,...

कविता की रचनात्मक भूमिका और ‘शब्दों का देश’: शशिभूषण मिश्र

कविता की रचनात्मक भूमिका और ‘शब्दों का देश’: शशिभूषण मिश्र

‘शब्दों का देश’ राकेश मिश्र का चौथा कविता संग्रह है जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने इसी वर्ष प्रकाशित किया है. इस संग्रह की समीक्षा युवा आलोचक शशिभूषण मिश्र ने लिखी है.

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