समीक्षा

‘पूर्णावतार’, ‘शिलावहा’ और अवतारवाद: विनोद शाही

‘पूर्णावतार’, ‘शिलावहा’ और अवतारवाद: विनोद शाही

अवतारवाद की अवधारणा भारतीय चिंतन के केंद्र में रही है, इसकी व्याप्ति इतनी है कि इसके विरोधी भी कालान्तर में अवतारी घोषित कर दिए गये. हेतु भारद्वाज की काव्य नाटिका-'पूर्णावतार',...

आलोचना पत्रिका और हिंदी साहित्य: दिनेश कुमार

आलोचना पत्रिका और हिंदी साहित्य: दिनेश कुमार

पत्रिकाएं छपतीं हैं, प्रकाशित सामग्री की चर्चा भी होती है पर सम्पूर्णता में पत्रिका की भूमिका को समझने के लिए यह जरूरी है कि उसकी सभी प्रकाशित सामग्री की कोई...

पेरियार ललई सिंह: वीरेन्द्र यादव

पेरियार ललई सिंह: वीरेन्द्र यादव

यथास्थितिवाद और आधुनिकता का द्वंद्व मनुष्य जाति के सबसे पुराने और अब तक असमाप्त द्वन्द्वों में से एक है. इसे राष्ट्र, धर्म, समुदाय, परिवार सभी स्तरों पर आज भी देखा...

रूस, रशिया और रासपूतिन: यतीश कुमार

रूस, रशिया और रासपूतिन: यतीश कुमार

गिरमिटियों पर आधारित ‘कुली लाइन्स’ से चर्चित प्रवीण कुमार झा की ‘रूस, रशिया और रासपूतिन’ पुस्तक इसी वर्ष वाणी से ‘इतिहास श्रृंखला’ के अंतर्गत छप कर आयी है. ‘लोकप्रिय इतिहास’...

देहरी पर दीपक: नीरज

देहरी पर दीपक: नीरज

आलोचक माधव हाड़ा इधर विवेचना और अन्वेषण दोनों कार्य बड़े मनोयोग से कर रहें हैं. कई अप्रकाशित, अल्पप्रचलित और अनुपलब्ध पुरानी साहित्यिक पोथियों पर आधारित उनका शोध-कार्य सामने आया है....

अच्छा आदमी: सुभाष चन्द्र गुप्त

अच्छा आदमी: सुभाष चन्द्र गुप्त

‘अच्छा आदमी’ पंकज मित्र का पांचवां कहानी संग्रह है जिसमें नौ कहानियां शामिल हैं. इसका प्रकाशन राजकमल ने किया है. इस संग्रह की चर्चा कर रहें हैं सुभाष चन्द्र गुप्त....

नये मगध में: पंकज चौधरी

नये मगध में: पंकज चौधरी

कवि-संपादक राकेश रेणु का तीसरा कविता संग्रह- ‘नये मगध में’ इसी वर्ष अनुज्ञा बुक्‍स से प्रकाशित हुआ है. इसकी चर्चा कर रहें हैं कवि पंकज चौधरी.

कीर्तिगान: सत्यम श्रीवास्तव

कीर्तिगान: सत्यम श्रीवास्तव

कथाकार चन्दन पाण्डेय के उपन्यास त्रयी का पहला उपन्यास- ‘वैधानिक गल्प’ प्रकाशित होकर चर्चित और प्रशंसित रहा है. दूसरा-‘कीर्तिगान’ इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है. इसकी चर्चा कर रहें हैं सत्यम...

दो गज़ ज़मीन: प्रकाश कान्त

दो गज़ ज़मीन: प्रकाश कान्त

कथाकार और संपादक हरि भटनागर का उपन्यास ‘दो गज़ ज़मीन’ शिवना प्रकाशन से इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है. इसकी चर्चा कर रहें हैं प्रकाश कान्त.

काला पानी क्रॉसिंग: महेश कुमार

काला पानी क्रॉसिंग: महेश कुमार

औपनिवेशिक भारत में मज़दूर एग्रीमेंट पर ब्रिटिश उपनिवेशों पर भेजे जाते थे. यह एग्रीमेंट धीरे-धीरे गिरमिटिया शब्द में बदल गया. इस ‘प्रवास’ के इतिहास पर आशुतोष भारद्वाज और जूडिथ एम...

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