आलेख

आज के समय में मैनेजर पाण्डेय: रविभूषण

आज के समय में मैनेजर पाण्डेय: रविभूषण

वरिष्ठ मार्क्सवादी आलोचक मैनेजर पाण्डेय आज अस्सी वर्ष के हो गये. उन्हें हिंदी समाज की तरफ से शुभकामनाएं. हिंदी आलोचना की सैद्धांतिकी में उनका महत्वपूर्ण अवदान है, उन्होंने कुछ सार्थक...

मुक्तिधर्मा आलोचक: मैनेजर पाण्डेय: रणेन्द्र

मुक्तिधर्मा आलोचक: मैनेजर पाण्डेय: रणेन्द्र

वरिष्ठ मार्क्सवादी आलोचक मैनेजर पाण्डेय आज अस्सी वर्ष के हो गये. उन्हें हिंदी समाज की तरफ से शुभकामनाएं. हिंदी आलोचना की सैद्धांतिकी में उनका महत्वपूर्ण अवदान है, उन्होंने कुछ सार्थक...

अक्का महादेवी और उनकी कविताएँ:  गगन गिल

अक्का महादेवी और उनकी कविताएँ: गगन गिल

गगन गिल की कविताएँ हों या गद्य वह ख़ुद में उतर कर लिखती हैं, संवेदनशीलता, मार्मिकता और संक्षिप्तता उनके गद्य की भी विशेषताएं हैं. अक्का महादेवी पर उनका लिखा पढ़ते...

मलय का काव्य-संसार: राहुल राजेश

मलय का काव्य-संसार: राहुल राजेश

“बुरे वक्त की रात में भी/जीता हूँ/सूरज की तरह/सामना करने से/भागकर/डूब नहीं जाता” इस तरह जीने और रचने वाले वरिष्ठ कवि मलय की रचनावली का प्रकाशन अभी हाल ही में...

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

हिंदी साहित्य में यहूदी लेखकों की संख्या गिनी चुनी रही है, वर्तमान में शीला रोहेकर एकमात्र हिंदी की यहूदी लेखिका हैं. दिनांत’ और ‘ताबीज़’ के अलावा ‘मिस सैम्युएल: एक यहूदी...

अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं में दाम्पत्य प्रेम:  सदाशिव श्रोत्रिय         

अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं में दाम्पत्य प्रेम:  सदाशिव श्रोत्रिय        

कवि अष्टभुजा शुक्ल की दाम्पत्य- प्रेम की कविता- ‘आज की रात’ और ‘बहुत बेचैन हिया’ जिनके प्रकाशन में लगभग एक दशक का अंतराल है, का चयन यहाँ सदाशिव श्रोत्रिय ने...

बांग्ला स्त्री-आत्मकथाएं: गरिमा श्रीवास्तव

बांग्ला स्त्री-आत्मकथाएं: गरिमा श्रीवास्तव

ब्रिटिश काल में बंगाल राष्ट्रवाद के उदय और सामाजिक-धार्मिक सुधारों का महत्वपूर्ण स्रोत था, उसका गहरा असर हिंदी प्रदेशों पर भी पड़ा. ऐसे में उस समय की बांग्ला स्त्रियाँ किस...

डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे: जीवन और स्वप्न: रवि रंजन

डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे: जीवन और स्वप्न: रवि रंजन

शरण कुमार लिंबाले के ‘अक्करमाशी’, और लक्ष्मण गायकवाड के ’उठाईगीर’ से हिंदी के पाठक परिचित हैं, पर इनके अनुवादक ‘सूर्यनारायण रणसुभे’ से अंजान. मराठी और हिंदी का बहुत पुराना नाता...

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