आलेख

सूसन सौन्टैग: एक पाठक की दुनिया में: प्रियंका दुबे

सूसन सौन्टैग: एक पाठक की दुनिया में: प्रियंका दुबे

प्रख्यात लेखिका, दार्शनिक, नाट्य और फ़िल्म निर्देशक सूसन सौन्टैग (16 जनवरी, 1933 – दिसम्बर 28, 2004) अपने समय की प्रसिद्ध शख्सियत थीं. उनका एक पहलू सामाजिक कार्यकर्ता का भी है....

सपना भट्ट की कविताएँ: सन्तोष अर्श

सपना भट्ट की कविताएँ: सन्तोष अर्श

सन्तोष अर्श समकालीन हिंदी कविता पर गम्भीरता से लिखते हैं, युवा कवियों के क्रम में सपना भट्ट की कविताओं पर लिखा है. कविताओं के मनोजगत में झाँकने की उनकी कोशिश...

जंगलात प्रतिरोधों की हरी-भरी परम्परा: शुभनीत कौशिक

जंगलात प्रतिरोधों की हरी-भरी परम्परा: शुभनीत कौशिक

हिमालय का क्षेत्र पहाड़ों के लिए ही नहीं जंगलों के लिए भी जाना जाता है, जंगल और उसके वृक्ष जहाँ उसकी संस्कृति के अटूट हिस्से हैं वहीं उनपर कारोबारियों की...

रैन भई चहुँ देस: अमीर ख़ुसरो: माधव हाड़ा

रैन भई चहुँ देस: अमीर ख़ुसरो: माधव हाड़ा

अमीर ख़ुसरो साहित्य (हिंदी, उर्दू, फ़ारसी) और इतिहास दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं. उनके व्यक्तित्व और महत्व पर माधव हाड़ा का यह आलेख रुचिकर है, प्रस्तुत है.

देह का अपने ‘भीतर’ से संवाद:  मदन सोनी

देह का अपने ‘भीतर’ से संवाद: मदन सोनी

लगभग चार दशकों से कवि-कर्म में संलग्न रुस्तम के सात कविता संग्रह प्रकाशित हैं. प्रचलित राजनीतिक मुहावरों से अलग सम्पूर्ण अस्तित्व के लिए उनकी कविताएँ लड़ती हैं. उनमें आदिम होने...

ख़ालिद जावेद: अँधेरों की उजास: उदयन वाजपेयी

ख़ालिद जावेद: अँधेरों की उजास: उदयन वाजपेयी

भारतीय साहित्य विशेष रूप से उपन्यासों के लिए साल 2022 कामयाब रहा, हिंदी के उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के अनुवाद को जहाँ ‘इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार’ मिला वहीं उर्दू के उपन्यास ‘नेमत ख़ाना’...

नारीवाद बनाम पितृसत्ता : रूबल

नारीवाद बनाम पितृसत्ता : रूबल

नारीवाद आधुनिक विश्व के कुछ महत्वपूर्ण विचारों में से एक है, यह जनांदोलन भी है और राजनीति भी. समानता, स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा जैसे मूल्यों से उपजे इसी नारीवाद...

ग़ालिब की शुरुआती शायरी पर एक अधूरी नज़र: सच्चिदानंद सिंह

ग़ालिब की शुरुआती शायरी पर एक अधूरी नज़र: सच्चिदानंद सिंह

सच्चिदानंद सिंह ग़ालिब के गम्भीर अध्येता हैं. ग़ालिब पर केन्द्रित यह उनका चौथा आलेख है इससे पहले आपने ‘दस्तंबू’, ‘ग़ालिब की दिल्ली’ तथा ‘समलैंगिक कामुकता की रवायत और ग़ालिब’ पढ़े...

रामचरितमानस का बालकाण्ड: प्रवीण कुमार

रामचरितमानस का बालकाण्ड: प्रवीण कुमार

महाकाव्य मनुष्यों की उदात्तकथाएं हैं, चरित्रों में देवत्व आरोपित हो जाने पर उनके प्रणय आदि पर कम ध्यान जाता है, पर ये प्रसंग कहीं-न-कहीं से अपनी चमक बिखेर ही देते...

मैनेजर पाण्डेय: अशोक वाजपेयी

मैनेजर पाण्डेय: अशोक वाजपेयी

आचार्य रामचंद्र शुक्ल से विकसित तथा रामविलास शर्मा से आगे बढ़ती हिंदी आलोचना की परम्परा ही मैनेजर पाण्डेय की परम्परा है. साहित्य की सामाजिकता के वह हिंदी ही नहीं भारत...

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