नाटक

मणिपुर के नाटक:  के. मंजरी श्रीवास्तव

मणिपुर के नाटक: के. मंजरी श्रीवास्तव

रतन थियाम रंगमंच की दुनिया के विश्वविख्यात रंगकर्मी हैं. मणिपुरी रंगमंच के और भी निर्देशक हैं जो खूब सक्रिय हैं और भारतीय रंगमंच को लगातार समृद्ध कर रहें हैं. के....

कावालम नारायण पणिक्कर:  सभ्यता का औदात्य:  संगीता गुन्देचा

कावालम नारायण पणिक्कर: सभ्यता का औदात्य: संगीता गुन्देचा

भरतमुनि का ‘नाट्यशास्त्र’ अपनी विषयगत व्यापकता और समग्रता के कारण आज भी नाटककारों के लिए प्रेरणा और चुनौती का विषय है. नाट्यशास्त्र की समकालीन व्याख्या करते हुए उसे अपने समय...

विश्व रंगमंच से कुछ ख़ास प्रस्तुतियाँ:  के. मंजरी श्रीवास्तव

विश्व रंगमंच से कुछ ख़ास प्रस्तुतियाँ: के. मंजरी श्रीवास्तव

साहित्य ही नहीं कला माध्यमों में भी विश्व स्तर पर बदलाव हो रहें हैं. विश्व-साहित्य से हिंदी-समाज कुछ परिचित है पर वैश्विक स्तर पर रंगमंच आदि की दुनिया में जो...

ऐसे भी तो सम्भव है रंगकर्म: संगीता गुन्देचा

ऐसे भी तो सम्भव है रंगकर्म: संगीता गुन्देचा

आश्रम प्राचीन भारतीय अवधारणा है, महात्मा गाँधी ने इसकी सक्रियता का विस्तार करते हुए इसे राजनीति से भी जोड़ा. कलाकारों ने भी इनका रचनात्मक इस्तेमाल किया है. रंगकर्मी राजेन्द्र पांचाल...

विश्व रंगमंच दिवस: के. मंजरी श्रीवास्तव

विश्व रंगमंच दिवस: के. मंजरी श्रीवास्तव

आज विश्व रंगमंच दिवस है (२७ मार्च). खड़ी बोली हिंदी साहित्य की शुरुआत में नाटकों की बड़ी भूमिका थी, इसके प्रस्तोता भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने ख़ुद रंगमंच में अभिनय किया था....

हबीब तनवीर: रंगकर्म और स्मृति: सत्यदेव त्रिपाठी

हबीब तनवीर: रंगकर्म और स्मृति: सत्यदेव त्रिपाठी

कला और साहित्य का असर राजनीति की तरह तत्काल नहीं दिखता पर होता गहरा है. सहृदय, विवेकवान और उदार मनुष्यता की निर्मिति में इसका महत्व असंदिग्ध है. इस तरह की...

रतन थियाम: रंगकर्म और सौन्दर्यबोध:  के. मंजरी श्रीवास्तव

रतन थियाम: रंगकर्म और सौन्दर्यबोध: के. मंजरी श्रीवास्तव

नाटककार और वरिष्ठ रंगकर्मी रतन थियाम (जन्म: 20 जनवरी 1948, मणिपुर) से रंगमंच और कलाओं में सौन्दर्यबोध की अवधारणा को लेकर यह बातचीत के. मंजरी श्रीवास्तव ने की है. रतन...

बंसी कौल: रंग ‘विदूषक’ यायावर निकल गया अपनी अंतिम यात्रा पर: सत्यदेव त्रिपाठी

थियेटर के लिए पद्मश्री से सम्मानित वंशी कौल (23 August 1949 – 6 February 2021) की संस्था ‘रंग विदूषक’ (भोपाल) नाटकों में अपने नवाचार के लिए विश्व विख्यात थी. कैंसर...

गिरीश कारनाड: रंजना मिश्र

गिरीश कारनाड: रंजना मिश्र

शब्दों की अपनी स्वायत्त सत्ता है, ये दीगर सत्ता केन्द्रों के समक्ष अक्सर प्रतिपक्ष में रहते हैं. शब्दों ने बद्धमूल नैतिकता पर चोट की है उसे खोला है, धर्म की...

बंदिश : २० से २०००० हर्ट्ज : रवींद्र त्रिपाठी

बंदिश : २० से २०००० हर्ट्ज : रवींद्र त्रिपाठी

पूर्वा नरेश के निर्देशन में मंचित नाटक ‘बंदिश  : २०  से २०००० हर्ट्ज’  ने कला मर्मज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इसके रंगमंचीय,  सामाजिक और राजनीतिक मन्तव्य पर रवींद्र...

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