विट्ठलनाथ, कृष्णदास और श्रीनाथ मन्दिर का सत्ता संघर्ष : भगवानदास मोरवाल
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
उपन्यास सामाजिक अध्ययन की दृष्टि से बड़े काम के होते हैं, यहाँ तक कि जिन्हें हम ‘लोकप्रिय साहित्य’ कहते हैं ...
काला पहाड़(१९९९), बाबल तेरा देस में(२००४) तथा रेत(2008) से चर्चित उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल (जन्म: २३ जनवरी, १९६०) इधर २०१४ से ...
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