मंगलेश डबराल : मैं शब्दों में नहीं, कहीं अलग से आती ध्वनियों में हूँ : ओम निश्चल
मंगलेश डबराल के छह कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं- ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’, ‘नये युग का शत्रु’ और...
मंगलेश डबराल के छह कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं- ‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’, ‘नये युग का शत्रु’ और...
हिंदी साहित्य का अधिकांश ऐसे लेखकों द्वारा सृजित है जो स्वभाव से दरवेश थे/हैं- सांसारिक अर्थों में निपट अव्यावहारिक पर साहित्य और विचार को लेकर सतर्क और सन्नद्ध. भारतेंदु से...
इधर की कविता में सक्रिय युवा पीढ़ी को मंगलेश डबराल ने बहुत प्रभावित किया है. देखने में शांत, संयमित, बोलने में संकोच के साथ हिचक का सादापन लिए मंगलेश खुलने...
बेढब बनारसी पर वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनजर पाण्डेय का यह लेख इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें जहाँ बेढब के व्यक्तित्व की आत्मीय ऊष्मा है वहीं उनकी व्यंग्य रचनाओं का सम्यक...
आज जनकवि नागार्जुन की बाईसवीं पुण्यतिथि है. इस अवसर पर ‘जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि’ द्वारा समारोह का आयोजन होता है और जनकवि नागार्जुन स्मारक निधि सम्मान की घोषणा होती है....
निराला की प्रसिद्ध कविता ‘तोड़ती पत्थर’ के कई पाठ हैं. इस कविता का एक दलित पाठ प्रसिद्ध लेखक कंवल भारती ने किया था. समालोचन पर ही शिव किशोर तिवारी की...
प्रवीण प्रणव माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य कर रहें हैं और साहित्य में भी उनकी रुचि है. उनके दो कविता संग्रह और कुछ लेख आदि प्रकाशित...
प्रख्यात आलोचक मैनेजर पाण्डेय के अस्सीवें वर्ष में समालोचन उनकी कृतियों को केंद्र में रखकर ‘आलोचना का आलोक’ आयोजन में आलेख प्रकाशित कर रहा है. इस क्रम में चिंतक-लेखक राजाराम...
लेखिकाओं के जन्मशताब्दी वर्ष आयोजन को लेकर हिंदी समाज अनुदार दिखता है. कथाकार चन्द्रकिरण सोनरेक्सा का जन्म आज ही के दिन सौ वर्ष पूर्व हुआ था. उनके लेखन पर चर्चाएँ...
(फोटो आभार : वीरेन्द्र गुसाईं) ‘भूख के अहसास को शेरो सुखन तक ले चलो.या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो.’(अदम गोंडवी) वरिष्ठ और महत्वपूर्ण आलोचक मैनेजर पाण्डेय ने अदम...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum