बातचीत

पद्मा सचदेव से अर्पण कुमार की बातचीत

पद्मा सचदेव से अर्पण कुमार की बातचीत

डोगरी भाषा की पहली आधुनिक कवयित्री पद्मा सचदेव का इक्यासी वर्ष की अवस्था में ४ अगस्त, २०२१ को निधन हो गया. उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए उनसे अर्पण कुमार...

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

हिंदी साहित्य में यहूदी लेखकों की संख्या गिनी चुनी रही है, वर्तमान में शीला रोहेकर एकमात्र हिंदी की यहूदी लेखिका हैं. दिनांत’ और ‘ताबीज़’ के अलावा ‘मिस सैम्युएल: एक यहूदी...

रणेन्द्र से मनोज मोहन की बातचीत

(मनोज मोहन और रणेन्द्र) ‘ग्लोबल गाँव के देवता’, ‘गायब होता देश’ और ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ जैसे  उपन्यासों के लेखक रणेन्द्र को इस वर्ष श्रीलाल शुक्ल इफको सम्मान से सम्मानित किया...

भगवानदास मोरवाल से राकेश श्रीमाल की बातचीत और ख़ा न ज़ा दा

  काला पहाड़(१९९९), बाबल तेरा देस में(२००४) तथा रेत(2008) से चर्चित उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल (जन्म: २३ जनवरी, १९६०) इधर २०१४ से लगभग हर साल उपन्यास आदि लिख रहें हैं- नरक...

अशोक वाजपेयी से अरुण देव की बातचीत

अशोक वाजपेयी से अरुण देव की बातचीत

लेखन, प्रकाशन, संपादन, संस्था-निर्माण और बहुविध आयोजनों की परिकल्पना और संचालन में अशोक वाजपेयी पिछले छह दशकों से सक्रिय हैं. साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान अप्रतिम,...

पैंसठवें पायदान पर धीरेन्द्र अस्थाना: राकेश श्रीमाल

(रेखांकन:सफदर शामी)धीरेन्द्र अस्थाना (जन्म : 25 दिसम्बर, 1956, मेरठ) ‘लोग हाशिए पर’, ‘आदमीखोर’, ‘मुहिम’, ‘विचित्र देश की प्रेमकथा’, ‘जो मारे जाएंगे’, ‘उस रात की गन्ध’, ‘खुल जा सिमसिम’, ‘नींद के...

रणेन्द्र से संतोष अर्श की बातचीत

रणेन्द्र द्वारा आदिवासी पृष्ठभूमि पर लिखे उपन्यासों- ‘ग्लोबल गाँव के देवता’ और ‘गायब होता देश’ ने वन और उसके वासियों की संस्कृति, संकट और संघर्ष को सबलता से प्रस्तुत करने...

कुँवर नारायण : कुमारजीव, स्मृति और संवाद : रेखा सेठी

 ‘कि उसमें विनम्र अभिलाषाएं हों बर्बर महत्त्वकांक्षाएं नहीं,’ हिंदी के महत्वपूर्ण कवियों में से एक कुंवर नारायण  का आज जन्म दिन है, कुंवर जी आज सशरीर होते तो ९३ वर्ष...

नरेश सक्सेना से संतोष अर्श की बातचीत (अंतिम क़िस्त)

हिंदी के वरिष्ठ और विशिष्ट कवि नरेश सक्सेना से युवा आलोचक-कवि संतोष अर्श की यह दीर्घ बातचीत अब यहाँ सम्पूर्ण होती है. तीन क़िस्तों में प्रकाशित इस संवाद में संतोष...

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