दर्शनशास्त्र के अध्येता संदीप सिंह जेएनयू छात्र संघ के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं. यह उनकी वैचारिक सक्रियता और...
भारतीय इतिहास-लेखन में हाशिए के समाजों (जिनमें स्त्रियाँ भी शामिल हैं) की निर्णायक भूमिका की पड़ताल आरंभ तो हुई है,...
औपनिवेशिक सत्ता हमेशा उपनिवेशित की छवि गढ़कर उसे बर्बर और हीन साबित करती रही है. इसी तर्क से उसने अपने...
इसाबेल अयेंदे के उपन्यास ईवा लूना का स्पेनिश से अंग्रेज़ी अनुवाद 1988 में हुआ और शीघ्र ही इसने अपनी एक...
पराधीन भारत में निर्मित और सृजित ज्ञान पर औपनिवेशिक प्रभाव का होना स्वाभाविक था. यह प्रभाव उपनिवेश को स्थायी बनाए...
अश्वघोष का ‘बुद्धचरित’ धार्मिक ही नहीं, साहित्यिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है. यह एक ऐसा महाकाव्य है, जो भारत में...
भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी ऑनलाइन लाइब्रेरी ‘कविता कोश’ और ‘गद्य कोश’ के संस्थापक ललित कुमार का जीवन संघर्षों से...
रज़ा की कलाकृतियों को देखना ही नहीं, उनके बारे में पढ़ना भी सम्मोहक अनुभव है. यशोधरा डालमिया की ‘सैयद हैदर...
2018 में प्रकाशित गीतांजलि श्री के पाँचवें उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के डेज़ी रॉकवेल द्वारा किए गए अंग्रेज़ी अनुवाद ‘Tomb of Sand’...
नदियाँ सभ्यता की बसाहट का आधार रही हैं. जल ने केवल जीवन ही नहीं, संस्कृति को भी सींचा है. रामशंकर...
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