‘फणीश्वरनाथ रेणु जन्म शताब्दी वर्ष’ में रेणु के लेखन की व्याख्या, विचार, पुनर्विचार की कोशिशें बड़े स्तर पर हो रहीं...
अनूप बाली ‘स्कूल ऑफ़ कल्चर एंड क्रिएटिव एक्सप्रेशन’ अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के शोध छात्र हैं. मुक्तिबोध के फैंटेसी के मनोविश्लेषण...
२०१६ के मार्च महीने में बलराम शुक्ल की कुछ संस्कृत कविताएँ और उनके हिंदी अनुवाद समालोचन पर प्रकाशित हुए थे....
हिंदी के वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार बटरोही इधर ‘हम तीन थोकदार’ शीर्षक से आख्यान लिख रहें हैं जिसे आप समालोचन पर क्रमश:...
कोरोना, क्वारनटीन और लॉक डाउन ने समूचे विश्व को प्रभावित किया है, रहने, देखने और सोचने में फ़र्क आया है....
( Mohamed Ahmed Ibrahim, Sitting Man)‘कुछ वैसी कविताएं पढूंजिसे लोक का तराशा हुआ कविअपनी किस्सागोई केविघटन काल में लिखता है.’राजीव कुमार का...
नील कमल अपनी कविताओं को लेकर गम्भीर हैं, अपने कवि को लेकर बे परवाह, यह कवि स्थापित होने की किसी...
सभ्यता का स्थिर जल हिलता है शिवदयाल ‘अपनी मर्जी की...
शकुंतिका : भगवानदास मोरवालपहला संस्करण : २०२०राजकमल प्रकाशन प्रा. लि.१- बी, नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली- ११०००२मूल्य : पेपरबैक...
कलाकार, कवि, गद्यकार सीरज सक्सेना (३० जनवरी १९७४, मध्य-प्रदेश) सिरेमिक, वस्त्र, पेंटिंग, लकड़ी और ग्राफिक कला जैसे विभिन्न माध्यमों में...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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