साहित्य

मुक्तिबोधीय फैंटेसी में वास्तविक का पुनरागमन : अनूप बाली

अनूप बाली ‘स्कूल ऑफ़ कल्चर एंड क्रिएटिव एक्सप्रेशन’ अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के शोध छात्र हैं. मुक्तिबोध के फैंटेसी के मनोविश्लेषण...

बटरोही : हम तीन थोकदार (छह)

हिंदी के वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार बटरोही इधर ‘हम तीन थोकदार’ शीर्षक से आख्यान लिख रहें हैं जिसे आप समालोचन पर क्रमश:...

फ़रीद ख़ाँ की कविताएँ

कोरोना, क्वारनटीन और लॉक डाउन ने समूचे विश्व को प्रभावित किया है,  रहने, देखने और सोचने में फ़र्क आया है....

राजीव कुमार की कविताएँ

( Mohamed Ahmed Ibrahim, Sitting Man)‘कुछ वैसी कविताएं पढूंजिसे लोक का तराशा हुआ कविअपनी किस्सागोई केविघटन काल में लिखता है.’राजीव कुमार का...

कला की जगहें : सीरज सक्सेना

कलाकार, कवि, गद्यकार सीरज सक्सेना (३० जनवरी १९७४, मध्य-प्रदेश) सिरेमिक, वस्त्र, पेंटिंग, लकड़ी और ग्राफिक कला जैसे विभिन्न माध्यमों में...

Page 104 of 174 1 103 104 105 174

फ़ेसबुक पर जुड़ें