ब्रजेश कृष्ण प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के अध्येता, विद्वान हैं और हिंदी के कवि भी. अपने इस आलेख को...
वरिष्ठ कथाकार मधु कांकरिया से जयश्री सिंह ने यह बहुत दिलचस्प बातचीत की है. लेखक कहाँ-कहाँ से कच्ची चीजें उठाता...
शैलेय के चार कविता संग्रह प्रकाशित हैं, उनका नया संग्रह ‘बीच दिसम्बर’ २०२० में सेतु प्रकाशन से प्रकाशित हुआ था....
बुद्धिजीवी की एक विशेषता यह भी होती है कि वह समकालीन समस्याओं को अतीत से जोड़ कर समझने का प्रयास...
विनोद शाही की ख्याति आलोचक-विचारक की है. इधर किसान आन्दोलन की वैचारिकी से सम्बन्धित उनके कई आलेख प्रकाशित हुए हैं....
किसी कवि की इससे बड़ी सफलता क्या होगी कि उसका काव्य इतना लोकप्रिय हो जाए कि घर में किसी मांगलिक...
यह भी दिलचस्प है कि सॉनेट जैसे विजातीय छंद में हिंदी के जातीय एवं सांस्कृतिक मानस के कवि त्रिलोचन ने...
हिंदी साहित्य में यहूदी लेखकों की संख्या गिनी चुनी रही है, वर्तमान में शीला रोहेकर एकमात्र हिंदी की यहूदी लेखिका...
भारतीय अंग्रेजी लेखकों में तिशानी दोषी उभरती हुयी शख़्सियत हैं, ‘गर्ल्स आर कमिंग आउट ऑफ द वुड्स’ उनका नवीनतम कविता...
ला:सलो क्रॉस्नॉहोरकै (Laszlo Krasznahorkai) को 2025 में साहित्य का नॉबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) से सम्मानित किया गया. उनकी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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