इज़ाबेल अलेंदे (चीले,१९४२) लातिन अमेरिकी कथा-जगत की मशहूर हस्ती हैं, उन्हें मार्केज़ और नेरुदा से प्रभावित माना जाता है, स्त्री...
महामारियां व्यवस्था की आपराधिक ख़ामियों को कत्ल-ए-आम मचाकर डरावने ढंग से उजागर करती हैं, यह मनुष्य की लोभ और...
‘खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएँ’ के बारह साल बाद हरे प्रकाश उपाध्याय का यह दूसरा कविता-संग्रह- ‘नया रास्ता’ रश्मि प्रकाशन...
मनुष्य की जो सभ्यता विकसित हुई उसमें किसी नियंता की कल्पना लगभग सार्वभौम है, उसे सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी भी होना...
कविता में जो जीवन देखते हैं और उसे बदलने का सपना रखते हैं, मोहन कुमार डहेरिया उसी परम्परा के कवि...
रमेश ऋतंभर की कविताएँ जीवन के सुख-दुःख की कविताएँ हैं. आसपास जो चल रहा है, उससे वह कविता उठाते हैं....
रेणु की ख्याति में उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ और उनकी कुछ कहानियों की केन्द्रीय भूमिका है. मैला आँचल के समानांतर...
कवि-आलोचक अच्युतानंद मिश्र वैचारिक आलोचनात्मक आलेख लिखते रहें हैं, पश्चिमी विचारकों पर उनकी पूरी श्रृंखला है जो समालोचन पर भी...
प्रस्तुत है विनोद पदरज की चौदह कविताएँ और यह भी कि वे कविताएँ क्यों लिखते हैं? विनोद पदरज की ये...
दयाशंकर शरण वरिष्ठ पीढ़ी के रचनाकार हैं, इधर उन्होंने नयी पीढ़ी से गज़ब का रचनात्मक संवाद स्थापित किया है, शायद...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum