हिंदी साहित्य का अधिकांश ऐसे लेखकों द्वारा सृजित है जो स्वभाव से दरवेश थे/हैं- सांसारिक अर्थों में निपट अव्यावहारिक पर...
इधर की कविता में सक्रिय युवा पीढ़ी को मंगलेश डबराल ने बहुत प्रभावित किया है. देखने में शांत, संयमित, बोलने...
"कवि जीवन भर प्रेम की खोज में लगा रहता है, यह एक तरह से जीवन की तलाश है. प्रेम केवल...
अम्बर पाण्डेय की कहानियों ने अपनी पहचान अर्जित की है और उनके अपने पाठक भी तैयार हुए हैं. उष्म भाषा,...
उत्तराखंड की संस्कृति, समाज और साहित्य पर आधारित वरिष्ठ कथाकार बटरोही का स्तम्भ ‘हम तीन थोकदार’ आप समालोचन पर पढ़...
बेढब बनारसी पर वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनजर पाण्डेय का यह लेख इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें जहाँ बेढब के व्यक्तित्व...
राजकमल चौधरी मात्र 38 वर्ष की उम्र में इस संसार से चल बसे, जीवन को जैसे जल्दी-जल्दी वह जी लेना...
अनंत ब्रह्मांड में पृथ्वी पर निवास करने वाला मनुष्य अपनी सोच और संवेदना की सीमा का असीमित विस्तार कर सकता...
सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर लिखने वाले सुपरिचित लेखक, अनुवादक सुभाष गाताडे हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा मराठी में भी लिखते...
नया कथाकार अपने साथ अछूता, अपूर्व कथा-संसार भी लाता है. बिजली चोरी के लिए कटिया लगाने वालों की भी अपनी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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