अस्सीवें में पहुंच रहे मैनेजर पाण्डेय अपने लेखन में नियमित हैं. इधर पांच वर्षों में मेरे देखने में उनकी पांच...
हीरा पायो गांठ गठियायो ...
आलोचना भी रचना है, वह जिस कृति से सम्बोधित होती है उससे पार जाती है और बड़े सामाजिक–सांस्कृतिक संदर्भों में...
साहित्य ही नहीं समाज को भी निर्भय आलोचकों की जरूरत होती है. मैनेजर पाण्डेय अपनी आलोचना से ये दोनों कार्य...
कथाकार भीमसेन त्यागी पर यह स्मृति आलेख मोहन गुप्त ने लिखा है. इस आलेख में साहित्य, प्रकाशन और संघर्ष का...
हिंदी के महत्वपूर्ण कवियों में से एक कुंवर नारायण का आज जन्म दिन है, कुंवर जी आज सशरीर होते तो...
विष्णु जी का प्रस्थान स्तब्ध करने वाला था. जो व्यक्ति अपने लेखन और अपने होने से साहित्य और विचारों की...
हिंदी के वरिष्ठ कथाकार बटरोही के ‘तीन थोकदार’ संस्कृति, राजनीति, साहित्य और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों की यात्रा करते हुए...
कवि के लिए कितना कुछ है देखने के लिए, कहने के लिए. कभी-कभी वह एक भीगते चित्र से कविता तराश...
किसी भी सम्प्रभु राष्ट्र की अपनी राष्ट्र भाषा होती है/होनी चाहिए. यह पश्चिम में विकसित राष्ट्र-राज्य की मूल अवधारणाओं में...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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