कविता

सोमेश शुक्ल की कविताएँ

सोमेश शुक्ल की कविताएँ

हिंदी कविता की दुनिया में विविधता उसी तरह है जिस तरह इस समाज में है. एक ही समय में तमाम चीजें एक साथ चलती रहती हैं. आप अपने लिए कोई...

सौरभ राय की कविताएँ

(पेंटिग : Shobha Broota)कवि और अनुवादक सौरभ राय को आप पढ़ते आ रहें हैं. वह बेंगलुरु में रहते हैं. अपने नये कविता संग्रह ‘काल वैसाखी’ की तैयारी में हैं. कुछ कविताएँ इसी...

कलकत्ता: कुछ कविताएँ : अंचित

कलकत्ता: कुछ कविताएँ : अंचित

समालोचन पर आप अंचित को पढ़ चुके हैं, कोलकाता पर केन्द्रित इन सात कविताओं के साथ वह फिर आपके समक्ष हैं. इन कविताओं में शहर तो है ही अपने अतीत...

मैं और मेरी कविताएँ (६) : संजय कुंदन

“Memory  revises  me.”  Li- Young Lee  समकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’, ‘रुस्तम’, ‘कृष्ण कल्पित’ और ‘अम्बर पाण्डेय’ को आपने पढ़ा....

मैं और मेरी कविताएँ (५) : अम्बर पाण्डेय

मैं और मेरी कविताएँ (५) : अम्बर पाण्डेय

समकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’, ‘रुस्तम’ और कृष्ण कल्पित को आपने पढ़ लिया है. आज समकालीन युवा कवियों में...

रितुरैण : नामवर, केदार, दूधनाथ : शिरीष कुमार मौर्य

कवि–आलोचक  शिरीष कुमार मौर्य इधर बहुत दिनों से दृश्य से अनुपस्थित थे. जैसा समय है उसमें कई बार यही विकल्प बचता है. नामवर सिंह के महाप्रस्थान ने उन्हें विचलित किया...

मैं और मेरी कविताएँ (४) : कृष्ण कल्पित

“Poetry is a political act because it involves telling the truth.”June Jordanसमकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने ‘आशुतोष दुबे’, ‘अनिरुद्ध उमट’ और ‘रुस्तम’...

मैं और मेरी कविताएँ (३): रुस्तम

मैं और मेरी कविताएँ (३): रुस्तम

समकालीन महत्वपूर्ण कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने ‘आशुतोष दुबे’ और ‘अनिरुद्ध उमट’ की कविताएँ और वे कविता क्यों लिखते हैं पढ़ा. आज रुस्तम सिंह...

मैं और मेरी कविताएँ (२): अनिरुद्ध उमट

मैं और मेरी कविताएँ (२): अनिरुद्ध उमट

‘मैं और मेरी कविताएँ’ स्तम्भ के अंतर्गत समकालीन महत्वपूर्ण कवियों की कविताएँ और वे ‘कविता क्यों लिखते हैं’ विषयक उनका वक्तव्य आप पढ़ेंगे. आशुतोष दुबे को आपने पढ़ा, इस श्रृंखला...

संदीप नाईक की कविताएँ

‘प्रेम में अबोला रहना भी एक रस है’कविताओं को जहाँ अन्य कलाओं ने प्यार किया, अपनाया और सहेज कर रखा, वहीँ कविताओं ने भी उन्हें अपने अंदर रचा. कलाओं के...

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