कविता : यक्षिणी ( कथान्तर ) : विनय कुमार
(पटना के बिहार म्यूजियम से)विनय कुमार मनोचिकित्सक हैं और हिंदी के लेखक भी. \'एक मनोचिकित्सक के नोट्स\', मनोचिकित्सा संवाद, \'मॉल में कबूतर\', ‘आम्रपाली और अन्य कविताएँ’ आदि पुस्तकें प्रकाशित हैं....
(पटना के बिहार म्यूजियम से)विनय कुमार मनोचिकित्सक हैं और हिंदी के लेखक भी. \'एक मनोचिकित्सक के नोट्स\', मनोचिकित्सा संवाद, \'मॉल में कबूतर\', ‘आम्रपाली और अन्य कविताएँ’ आदि पुस्तकें प्रकाशित हैं....
(फोटो आभार : H. C. Bresson)हिंदी कविता की दुनिया युवतर कवियों से आबाद है. ये कवि अपनी समझ और निपुणता के साथ जब सामने आते हैं तो विस्मय होता है...
(Virginie Demont Breton - FISHERMAN\'S WIFE AFTER BATHING CHILDREN , 1881)रुस्तम जीवन में भी मितभाषी हैं और यह समझते हैं कि जीवन आराम से जीने वाली चीज है जिससे कि...
(यह अद्भुत फोटो विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर H. C . Bresson द्वारा Romania में 1975. में कहीं लिया गया था. आभार के साथ)राजकमल प्रकाशन संस्थान से प्रकाशित कविता संग्रह ‘अपने आकाश में’...
बमुश्किल २० साल की विनिता यादव फिलहाल मूर्तिकला और चित्रकला में कौशल हासिल कर रही हैं, पेंटिग बना रहीं हैं, कविताएँ लिख रहीं हैं. अन्य कलाओं से सम्बद्ध कवियों की...
दीपक जायसवाल (जन्म : ७ मई १९९१, कुशीनगर) दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में गोल्डमेडलिस्ट हैं (परास्नातक) और वहीं से शोध कार्य (पीएच. डी) भी कर रहे हैं. उनकी दो...
(पेंटिग: लाल रत्नाकर)युवा संतोष अर्श शोध और आलोचना के क्षेत्र में जहाँ ध्यान खींच रहे हैं वहीँ उनकी कविताएँ भी अपनी पहचान निर्मित कर रहीं हैं. भाव और भाषा को...
कला अनुशासनों पर आधारित कविताओं का संग्रह ‘जन्म से ही जीवित है पृथ्वी’ प्रेमशंकर शुक्ल का पांचवाँ कविता संग्रह है. प्रेमशंकर शुक्ल मुख्यत: प्रेम के शुक्ल पक्ष के कवि हैं....
सवाई सिंह शेखावत (फरवरी १३, १९४७) के आठवें कविता संग्रह ‘निज कवि धातु बचाई मैंने (२०१७) को इस वर्ष राजस्थान साहित्य अकादमी के मीरा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है....
अस्सी वर्षीय भारतरत्न भार्गव (१९३८) का चालीस वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद दूसरा कविता संग्रह ‘घिसी चप्पल की कील’ संभावना प्रकाशन से इसी वर्ष (२०१८) प्रकाशित हुआ है. भारतरत्न...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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