वास्को डी गामा की साइकिल (प्रवीण कुमार): सत्यप्रकाश सिंह
(किताब)चर्चित कथाकार प्रवीण कुमार का दूसरा कहानी संग्रह ‘वास्को डी गामा की साइकिल’ अभी-अभी ही राजपाल से प्रकाशित हुआ है. इसमें सात कहानियाँ शामिल हैं. इनमें से एक ‘सिद्ध पुरुष’...
(किताब)चर्चित कथाकार प्रवीण कुमार का दूसरा कहानी संग्रह ‘वास्को डी गामा की साइकिल’ अभी-अभी ही राजपाल से प्रकाशित हुआ है. इसमें सात कहानियाँ शामिल हैं. इनमें से एक ‘सिद्ध पुरुष’...
ज्ञान चंद्र बागड़ी समाजशास्त्र और मानवशास्त्र के अध्ययन-अध्यापन से जुड़े हैं. उनके पहले उपन्यास \'आख़िरी गाँव\' का प्रकाशन वाणी ने किया है. इसकी चर्चा कर रहें हैं - रामानंद राठीआख़िरी...
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नेताओं का वकालत और लेखन से गहरा सम्बन्ध था, इनमें से बहुत तो पत्र-पत्रिकाओं के संपादक भी रहें हैं. स्त्रियाँ भी इसमें पीछे नहीं थीं. राजनेता,...
प्रचण्ड प्रवीर के ‘उत्तरायण’ में मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष, मिथुन तथा ‘दक्षिणायन’ में कर्क, सिंह,कन्या, वृश्चिक संक्रांति तथा धनु शीर्षक से कहानियां संकलित है. इधर प्रवीर ने उपनिषदों को...
अस्सीवें में पहुंच रहे मैनेजर पाण्डेय अपने लेखन में नियमित हैं. इधर पांच वर्षों में मेरे देखने में उनकी पांच किताबें प्रकाशित हुईं हैं- ‘लोकगीतों और गीतों में १८५७’, ‘मुग़ल...
कथाकार तरुण भटनागर का उपन्यास, ‘राजा,जंगल,और काला चाँद’ आधार प्रकाशन से २०१९ में प्रकाशित हुआ था, जो ४१ अध्यायों में विभक्त है. इनके नाम दिलचस्प और मानीख़ेज़ हैं जैसे- राजा...
हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता में ज्ञानरंजन द्वारा संपादित ‘पहल’ का योगदान शानदार है, वह कई दशकों से साहित्य और विचार की महत्वपूर्ण पत्रिका बनी हुई है. इस विकट समय में...
प्रसिद्ध लेखक-आलोचक ओम निश्चल की इसी वर्ष प्रकाशित ‘आलोचनानुशीलन’ की पुस्तक ‘समकालीन हिंदी कविता ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (1980-2020) \'विजया बुक\' प्रकाशक से छपी है जो सदी के अंतिम बीस वर्षों की...
वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनेजर पाण्डेय आगामी २३ सितम्बर को अपने जीवन के अस्सीवें वर्ष में प्रवेश कर रहें हैं. आलोचक के रूप में वह हिंदी आलोचना में पिछले पांच दशकों...
सभ्यता का स्थिर जल हिलता है शिवदयाल ‘अपनी मर्जी की जगह पर रहनाएक तनी हुई रस्सी पर चलने से कम...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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