समीक्षा

परख : हुल पहाड़िया (उपन्यास) – राकेश कुमार सिंह : राकेश बिहारी

नेपथ्य का नायक – तिलका मांझी       राकेश बिहारी बाहरीशक्तियों द्वारा किसी समाज या समुदाय विशेष की पहचान और अस्मिता के अतिक्रमण तथा उसके विरोध की कड़ियों के दस्तावेजीकरण से...

परख : आदिम बस्तिओं के बीच

आदिम बस्तिओं के बीच (कविता संग्रह)नन्द भारद्वाजप्रकाशक :विजया बुक्सनवीन शाहदरा, दिल्ली - ११००३२प्रथम संस्करण - २०११मूल्य - १७५ रूपयेसमीक्षा : अपर्णा मनोज ______________स्मृतियाँ ::पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती हलके में रेतीले धोरों...

कई चाँद थे सरे आसमां: गोपाल प्रधान

कई चाँद थे सरे आस्माँ (उपन्यास)लेखक : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ीउर्दू से अनुवाद : नरेश ‘नदीम’प्रकाशक : पेंगुइन बुक्स,इंडिया/यात्रा बुक्ससंस्करण : २०१०. मूल्य : ४७५.पृष्ठ संख्या :७४८शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी :: (१९३५. आजमगढ़)उर्दू के शीर्षस्थ आलोचकसाहित्य...

शिगाफ़ : सुमन केशरी

शिग़ाफ़ : दरारों पर पुल बनाने की कोशिशसुमन केशरी राजकमल से २०१० में प्रकाशित मनीषा कुलश्रेष्ठ के  उपन्यास शिगाफ पर जिज्ञासा द्वारा आयोजित परिचर्चा में सुमन केशरी का आलेख. कृति...

रावी लिखता है : अब्दुल बिस्मिल्लाह

रावी लिखता है(उपन्यास)अब्दुल बिस्मिल्लाह .प्रथम संस्करण-2010.मूल्य-200 रूपए.राजकमल प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली-02ग्लोबल मुस्लिम जगत के बयानपुखराज जाँगिड़अब्दुल बिस्मिल्लाह  का नया उपन्यास ‘रावी लिखता है’ (2010) पहली बार ‘बया’ (दिसंबर 2007) में हिंदी में तथा अनुदित रूप में...

Page 18 of 18 1 17 18

फ़ेसबुक पर जुड़ें

ADVERTISEMENT