ज्ञानरंजन का कथा-संसार : प्रेमकुमार मणि
लेखक जब संपादक भी हो जाता है तब संपादन की ज़िम्मेदारी उसके लेखन पर दो तरह से असर डालती है. ...
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लेखक जब संपादक भी हो जाता है तब संपादन की ज़िम्मेदारी उसके लेखन पर दो तरह से असर डालती है. ...
1973 से 2021 के बीच प्रकाशित पहल के 125 अंक ज्ञानरंजन की प्रतिबद्धता, संकल्प और ऊर्जा के दस्तावेज़ हैं. साहित्यिक ...
वरिष्ठ कथाकार और ‘पहल’ पत्रिका के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन ने आज जीवन के पचासी वर्ष पूरे कर लिए हैं, समालोचन ...
कथाकार और पहल पत्रिका के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन की क़िताब ‘उपस्थिति का अर्थ’ इसी वर्ष सेतु प्रकाशन से छप कर ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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