विट्ठलनाथ, कृष्णदास और श्रीनाथ मन्दिर का सत्ता संघर्ष : भगवानदास मोरवाल
हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
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हिंदी के वरिष्ठ उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल की सक्रियता और सृजनात्मक उर्वरता विस्मित करती है. पिछले वर्ष ही उनका भारी-भरकम बारहवाँ ...
किसी ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति पर समीक्षात्मक आलेख दो स्तरों पर उस कृति को देखता है, उसमें कहाँ तक इतिहास है ...
काला पहाड़(१९९९), बाबल तेरा देस में(२००४) तथा रेत(2008) से चर्चित उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल (जन्म: २३ जनवरी, १९६०) इधर २०१४ से ...
शकुंतिका : भगवानदास मोरवालपहला संस्करण : २०२०राजकमल प्रकाशन प्रा. लि.१- बी, नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली- ११०००२मूल्य : पेपरबैक ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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