संस्कृत का शूद्र कवि शूद्रक और मृच्छकटिकम् : प्रेमकुमार मणि
अपने यथार्थवादी कथानक के कारण मृच्छकटिकम् संस्कृत नाट्यपरंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाटक है, जिसे प्रायः ईसा की प्रारंभिक शताब्दियों ...
अपने यथार्थवादी कथानक के कारण मृच्छकटिकम् संस्कृत नाट्यपरंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाटक है, जिसे प्रायः ईसा की प्रारंभिक शताब्दियों ...
लेखक जब संपादक भी हो जाता है तब संपादन की ज़िम्मेदारी उसके लेखन पर दो तरह से असर डालती है. ...
गांधी की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उनसे प्यार करना नहीं छोड़ा जा सकता. ऐसा व्यक्ति सभ्यता का अर्जित ...
बांग्ला देश में अभी जो कुछ हुआ है उससे बरबस ही गरिमा श्रीवास्तव के उपन्यास ‘आउशवित्ज़: एक प्रेम कथा’ की ...
प्रेमचंद की कहानियों में ‘शतरंज के खिलाड़ी’ और ‘कफ़न’ का अपना ख़ास स्थान है. एक को जहाँ देशी रियासतों के ...
प्रेमचंद की परम्परा क्या है और उनकी परम्परा का किस तरह विकास हुआ है. यह ऐसा विषय है जिसपर लगातार ...
रेणु की ख्याति में उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ और उनकी कुछ कहानियों की केन्द्रीय भूमिका है. मैला आँचल के समानांतर ...
सौ साल पहले आज ही के दिन फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म जिला पूर्णिया के गाँव औराही हिंगना में हुआ था. ...
आलोचक रविभूषण का मानना है कि रणेन्द्र का उपन्यास ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ गहन अध्ययन, श्रम-अध्यवसाय से लिखा गया एक ...
‘वापसी’ जैसी कालजयी कहानियों के अलावा ‘पचपन खंभे लाल दीवारें’, ‘रुकोगी नहीं राधिका’, ‘शेषयात्रा, ‘अंतर्वंशी’,‘भया कबीर उदास’, ‘नदी’, \'अल्पविराम\' आदि ...
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