फ़िल्म पाकीज़ा हिंदी सिनेमा के संवेदनशील अंकन, भावप्रवण अभिनय और कलात्मक दृश्य-विधान का उत्कर्ष है, इसमें किसी महाकाव्य जैसी गहराई...
Read moreसैयद हैदर रज़ा की कला और शख़्सियत पर आधारित अखिलेश का यह स्तम्भ ‘रज़ा: जैसा मैंने देखा’ धीरे-धीरे अपनी सम्पूर्णता...
Read moreपेंटिंग देखकर कवियों ने कविताएँ लिखीं हैं, कविताएँ पढ़कर भी चित्र बनाये जाते हैं. कभी-कभी दोनों साथ-साथ भी रहते हैं....
Read moreहरि मृदुल ने ‘अमर उजाला’ के मुंबई ब्यूरो में विशेष संवाददाता रहते हुए चमकती फिल्मी दुनिया के अँधेरे और टूटन...
Read moreप्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा के जीवन और उनकी चित्रकला पर आधारित स्तम्भ ‘रजा: जैसा मैंने देखा’ पिछले कई महीनों से...
Read moreअंतहीन पन्नों की कॉपी के किसी कोरे पन्ने पर यह जो आज तिथि अंकित की गयी है, उसे नव वर्ष...
Read moreकलाओं के आपसी रिश्ते घनिष्ठ रहें हैं. संगीत से कविता का नाता आदि से अबतक अनवरत है. चित्र से कविता...
Read moreचित्रकार सैयद हैदर रज़ा पर अखिलेश द्वारा लिखे जा रहे ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ का यह सातवाँ हिस्सा प्रस्तुत...
Read moreमूर्धन्य चित्रकार सैयद हैदर रज़ा पर अखिलेश द्वारा लिखे जा रहे ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ का नवीनतम अंश प्रस्तुत...
Read moreप्रख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा: जैसा मैंने देखा’ की इस कड़ी में अखिलेश ने उनके चित्रों...
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