अभिनेता दिलीप कुमार की प्रसिद्धि असाधारण थी, वह अद्वितीय हैं. जिस तरह से उनके व्यक्तित्व में गहराई है उसी तरह...
Read moreसमाज में पुरुष-समलैंगिकता लज्जा और उत्पीड़न तथा फिल्मों में उपहास का विषय रही है. इधर कुछ संवेदनशील निर्देशकों ने इस...
Read moreशिल्पकार शम्पा शाह का लोक और आदिवासी कलाओं पर आधारित लेखन भी महत्वपूर्ण हैं. काँगड़ा चित्र-शैली की विशेषताओं...
Read moreअब्बास कैरोस्तमी को ईरान का आधुनिक सूफी कहा गया जिसके रंग उनकी फिल्मों में बिखरें हैं, पाबंदियों के बीच आज़ाद....
Read moreमोहम्मद रफ़ी पर यह शानदार क़िताब अंग्रेजी में राजू कोरती और धीरेंद्र जैन ने लिखी है जिसे प्रामाणिक जीवनी कहा...
Read moreसिनेमा विश्व की आधुनिक और सबसे लोकप्रिय विधा है. उसमें लगभग सभी ललित कलाओं का समावेश हो जाता है, अभिनय,...
Read moreथियेटर के लिए पद्मश्री से सम्मानित वंशी कौल (23 August 1949 – 6 February 2021) की संस्था ‘रंग विदूषक’ (भोपाल)...
Read moreअखिलेश द्वारा लिखी यह श्रृंखला ‘रज़ा जैसे मैंने देखा’ इस कड़ी के साथ अब यहाँ सम्पूर्ण हुई, समालोचन में यह...
Read moreचित्रकार और लेखक अखिलेश द्वारा लिखित विश्व प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा के जीवन और चित्रकारी पर आधारित स्तम्भ, ‘रज़ा...
Read moreभूरीबाई को इस वर्ष के पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा के साथ ही उन्हें लेकर जिज्ञासा प्रकट की जाने...
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समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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