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‘जेएनयू अनंत : जेएनयू कथा अनंता’ और ‘हाउस हसबैंड की डायरी’ जैसे चर्चित किताबों के लेखक जे. सुशील की संस्मरणात्मक...
‘शिया बटर’, ‘कैफ़े कॉफ़ी डे’, ‘बंकर’ जैसी कहानियों के लेखक कैफ़ी हाशमी का कहानी संग्रह, ‘शिया बटर’ इसी वर्ष लोकभारती...
विनोद कुमार शुक्ल के सहज, लगभग निर्विकार जीवन को वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सुदीप ठाकुर ने निकट से देखा है....
आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि भारत में बौद्ध धर्म क्रमशः अवनति की ओर बढ़ता हुआ अंततः विलुप्त...
सत्यव्रत रजक की कुछ नई कविताएँ प्रस्तुत हैं.
‘कंगले और चरित्रहीन होते हैं लेखक!’. ऐसी आत्मभर्त्सना केवल कविता ही अपने लिए लिख सकती है. देवेश पथ सारिया की...
नेहा नरूका की कविताएँ सत्ता और सर्वसम्मति के समकालीन गठजोड़ को प्रश्नांकित करती हैं. उस नैतिक तनाव में आकार लेती...
शुभम नेगी के पास कहने के लिए बहुत कुछ है, और वे उसे तरह-तरह से कहते हैं. कहानियों से, फ़िल्मों...
१९६७ में अज्ञेय ने आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी से यह जानना चाहा था कि इक्कीसवीं सदी का हिंदी साहित्य कैसा होगा....
रमाकांत शर्मा ‘उद्भ्रांत’ (4 सितम्बर, 1948) की आत्मकथा ‘मैंने जो जिया’ के तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं. कवि की...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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