प्रमाण दिखाने और ख़ुद को साबित करने की इस महामारी में न जाने कितने लोग पिस रहे हैं. आधार कार्ड,...
अपने इस आलेख में अजय कुमार यादव इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि भक्ति आन्दोलन की निर्गुण धारा के क्रांतिकारी...
वरिष्ठ पत्रकार-लेखक त्रिभुवन जिस विषय पर भी लिखते हैं, उसे व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए उसकी जड़ों तक पहुँच जाते...
समुद्र की अथाह गहराइयों से होते हुए जीवन धरती के समतल पर पसरता चला गया. लाखों वर्षों के परिवर्तनों के...
गरिमा श्रीवास्तव पिछले कई दशकों से तैयारी, तल्लीनता और तसल्ली के साथ लेखन, आलोचना तथा संचयन-संपादन का कार्य कर रही...
सत्यदेव त्रिपाठी की संस्मरणात्मक पुस्तक 'रंग यात्रियों के राहे गुज़र' में डॉ. श्रीराम लागू, ए. के. हंगल, हबीब तनवीर, सत्यदेव...
हिंदी में मौलिक सामाजिक‑राजनीतिक विषयों पर स्तरीय पुस्तकें लगातार प्रकाशित हो रही हैं. साथ ही महत्वपूर्ण अनूदित कृतियाँ भी सामने...
गार्गी मिश्र की इन कविताओं में बिखरते, टूटते और ठूँठ होते समय की विविध संवेदनाएँ हैं. इनमें एक ऐसी निर्लिप्तता...
बिना विश्वदृष्टि के कोई लेखक सचमुच बड़ा नहीं हो सकता. उससे सहमत-असहमत हुआ जा सकता है. इसमें कोई संदेह नहीं...
इस समय का एक यथार्थ यह भी है कि हम स्वयं को सतत निगरानी में पाते हैं. हमारी लगभग सभी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum