आलोचना

‘अंग्रेजी ढंग का नावेल’ और भारतीय उपन्यास: नामवर सिंह

‘अंग्रेजी ढंग का नावेल’ और भारतीय उपन्यास: नामवर सिंह

प्रेमचन्द साहित्य संस्थान गोरखपुर से संपादक केदारनाथ सिंह और सह संपादक सदानंद शाही द्वारा 'साखी' पत्रिका का प्रवेशांक अक्तूबर-दिसम्बर,१९९२ में निकला था.  इस अंक में नामवर सिंह का लेख छपा...

यथार्थ और साहित्य : रोहिणी अग्रवाल

रोहिणी अग्रवाल कथाकार के साथ  कथा–साहित्य की गम्भीर अध्य्येता भी हैं. इस पुस्तक मेले में उनकी आलोचना किताब ‘साहित्य का स्त्री स्वर’ साहित्य भंडार इलाहबाद से और  \'हिंदी कहानी: वक्त...

कबीर का घर और देश: सदानन्द शाही

कबीर का घर और देश: सदानन्द शाही

कबीर की कविता में घर और देश को लेकर आलोचक प्रो. सदानन्द शाही का यह व्याख्यान भक्तिकाल के तीन बड़े कवियों कबीर, तुलसी और रैदास के अपने-अपने  आदर्श राज्यों की...

कबीर: जाति जुलाहा मति का धीर: सदानंद शाही

कबीर: जाति जुलाहा मति का धीर: सदानंद शाही

कबीर के अपढ़ होने को स्थापित तथ्य माना जाता है. किसने स्थापित किया, क्यों किया और क्या वास्तव में कबीर अपढ़ थे, क्या साक्षर होना ही पढ़ा-लिखा होना है, अनुभव,...

कुँवर नारायण की कविता: शिरीष कुमार मौर्य

कुँवर नारायण की कविता: शिरीष कुमार मौर्य

मुक्तिबोध ने कुँवर नारायण को ‘कविता में अंतरात्मा की पीड़ित विवेक चेतना और जीवन की आलोचना’ का कवि कहा है. खुद कुँवर नारायण यह मानते हैं कि ‘कविता मूलत: एक...

रामविलास शर्मा और हिंदी नवजागरण: मैनेजर पाण्डेय

रामविलास शर्मा और हिंदी नवजागरण: मैनेजर पाण्डेय

रामविलास शर्मा की हिंदी नवजागरण  की विचारधारा पिछले कई दशकों से अकादमिक दुनिया में व्याख्या और आलोचना के केन्द्र में रही है. हिंदी नवजागरण के अस्तित्व और उसके प्रभाव पर...

शमशेर बहादुर सिंह: अशोक कुमार पाण्डेय

शमशेर बहादुर सिंह: अशोक कुमार पाण्डेय

शमशेर बहादुर सिंह आलोचकों की दुविधा हैं. केदारनाथ अग्रवाल ने कही लिखा है- 'वहाँ उस आईने में खड़ा है मेरा दोस्त– शमशेर! उम्र कैद का अकेला अपराधी.' अशोक कुमार पाण्डेय...

शमशेर प्रेम की असंभावना के कवि अधिक हैं : अशोक वाजपेयी

ll शमशेर :: जन्म शताब्दी वर्ष llपिछले पांच दशकों से साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय कवि, आलोचक, संपादक,और आयोजक अशोक वाजपेयी के कई कविता-संग्रह और आलोचना–पुस्तकें प्रकाशित हैं....

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