आलोचना

क्या आचार्य रामचंद्र शुक्ल जातिवादी और साम्प्रदायिक हैं ? प्रेमकुमार मणि

क्या आचार्य रामचंद्र शुक्ल जातिवादी और साम्प्रदायिक हैं ? प्रेमकुमार मणि

आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखन और आलोचना में शीर्ष पुरुष हैं. उनसे वाद–विवाद से ही आप हिंदी साहित्य से संवाद कर सकते हैं. जातिवादी और साम्प्रदायिक होने के...

मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएँ : गरिमा श्रीवास्तव

मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएँ : गरिमा श्रीवास्तव

प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का शोध आलेख ‘चुप्पियाँ और दरारें’ मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाओं का विस्तृत विश्लेषण विवेचन करता है, इनमें साहित्य, संस्कृति और राजनीति से जुड़ी प्रसिद्ध स्त्रियाँ भी शामिल...

पंकज बिष्ट की कहानियाँ : राकेश बिहारी

‘समयांतर’ के संपादक पंकज बिष्ट (जन्म : २० फरवरी, १९४६) का आज ७५ वां जन्म दिन है. पांच दशकों की उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा के विविध आयाम हैं- कहानियाँ,...

आख्यान-प्रतिआख्यान (१):अग्निलीक(हृषीकेश सुलभ):राकेश बिहारी

यूरोप में राष्ट्र राज्य-और उपन्यासों का उदय साथ-साथ हुआ, लोकतंत्रात्मक समाज की ही तरह उपन्यासों में भी तरह-तरह के पात्र आपस में भिन्न विचारों के साथ संवादरत रहते हैं. भारत...

केरल में सामाजिक आंदोलन और दलित साहित्य : बजरंग बिहारी तिवारी

नवारुण प्रकाशनसी- 303 जनसत्ता अपार्टमेंट्स सेक्टर -9गाज़ियाबाद बजरंग बिहारी तिवारी आलोचना में शोध के महत्व को समझने वाले आलोचकों में हैं. स्रोतों की तलाश और विवेकपूर्ण ढंग से उनका उपयोग उनकी...

कबीर: साखी आंखी ज्ञान की : सदानंद शाही

कबीर: साखी आंखी ज्ञान की : सदानंद शाही

कबीर हिंदी साहित्य के अध्यात्म हैं. उनको पढ़ना, सुनना, गुनना मनुष्यता को औदात्य प्रदान करता है. वे किसी के नहीं हैं और इसीलिए सबके हैं. गांधी की तरह. मनुष्य जब...

उपन्यास की वैचारिक सत्ता : आशुतोष भारद्वाज

कवि, रंग-समीक्षक, अनुवादक और संपादक नेमिचन्द्र जैन (१६ अगस्त-१९१९ : २४ मार्च २००५) का यह शती वर्ष है जिसके अंतर्गत उपन्यास, कविता, रंगमंच, संस्कृति, स्मृति-व्याख्यान आदि अनेक समारोह हो रहे...

पितृ-वध : आशुतोष भारद्वाज

(sculpture by great ketelaars)पुत्र एक समय के बाद पिता बन जाता है. क्या वह पिता को अपदस्त करके पिता बनता है ? सत्ता के लिए पुत्र द्वारा पिता का वध...

सावित्रीबाई फुले की कविताई : बजरंग बिहारी तिवारी

महान सुधारक सावित्रीबाई फुले कवयित्री भी थीं. उनके मराठी में दो संग्रह प्रकाशित हुए- ‘काव्यफुले’ (१८५४) तथा ‘बावन्नकशी सुबोधरत्नाकर’ (१८९१).‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले की कविताएँ औपनिवेशिक भारत में  समाजिक-धार्मिक क्रान्ति की...

उपन्यास के भारत की स्त्री (चार) : आशुतोष भारद्वाज

(Amrita Shergil : Self-portrait)‘उपन्यास के भारत की स्त्री’ के अंतर्गत अब प्रस्तुत है समापन क़िस्त ‘स्त्री का एकांत: अपूर्णता का विधान’. इससे पहले आपने पढ़ा है -(एक) ‘आरंभिका : हसरतें और...

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