कहानियाँ झूठी होती हैं, पर सच से कम सच भी नहीं होतीं, यही इनकी ताकत है. हिंदी की युवा पीढ़ी...
साहित्य में कोरोना का प्रवेश हो गया है, विषय के रूप में. लेखकों ने मनुष्य जाति के समक्ष उपस्थित इस...
मिथकीय पात्रों पर आधारित उपन्यासों का हिंदी में पाठक वर्ग है. अंग्रेजी भाषी पाठकों में तो इसकी मांग रहती ही...
( Philosopher ludwig wittgenstein portrait by Renée Jorgensen)आदित्य कहानियाँ लिख रहें हैं. उनकी कहानियों पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष काफ्काई प्रभाव देखा जा सकता...
विजय राय के संपादन में लमही का ‘हमारा कथा समय’ तीन अंको में फैला हुआ है, लगभग १७५ आलेखों वाले...
राजकमल निःसंदेह हिंदी ही नहीं भारतीय भाषाओं का सर्वश्रेष्ठ प्रकाशन संस्थान है. इसकी उम्र आज़ाद भारत की ही उम्र है....
केदारनाथ सिंह (१९ नवम्बर १९३४ - १९ मार्च २०१८) की आज दूसरी पुण्यतिथि है. इस बीच उन्हें अलग अलग ढंग...
बंसत त्रिपाठी को २००४ से पढ़ता आ रहा हूँ जब उनका संग्रह ‘सहसा कुछ नहीं होता’ ज्ञानपीठ ने छापा था,...
नई सदी के हिंदी उपन्यासों की अर्थवत्ता और सार्थकता के आकलन के स्तम्भ ‘आख्यान-प्रतिआख्यान’ की इस दूसरी कड़ी में युवा...
बीसवीं शताब्दी के बड़े कवि पाब्लो नेरुदा (१२ जुलाई १९०४ - २३ सितम्बर १९७३) को उनकी कविताओं के लिए १९७१...
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