के. मंजरी श्रीवास्तव की कविताएँ
के. मंजरी श्रीवास्तव की ये पाँचों कविताएँ सीधे-सीधे रंगमंच से जुड़ी हैं, रंग-प्रस्तुतियों के सम्मोहक अनुभव से अंकुरित ये पाँचों कविताएँ उनका विस्तार करती हैं. कलाओं के आपसी जुड़ाव का...
के. मंजरी श्रीवास्तव की ये पाँचों कविताएँ सीधे-सीधे रंगमंच से जुड़ी हैं, रंग-प्रस्तुतियों के सम्मोहक अनुभव से अंकुरित ये पाँचों कविताएँ उनका विस्तार करती हैं. कलाओं के आपसी जुड़ाव का...
‘कई बार सुबह-सुबह घर से निकलते हैं और सड़क पर रात मिल जाती है.’ साहित्य में रात और दिन अपने प्रतीकात्मक अर्थों में ही अधिक प्रयुक्त होते हैं. ये...
"कवि जीवन भर प्रेम की खोज में लगा रहता है, यह एक तरह से जीवन की तलाश है. प्रेम केवल स्मृति भर नहीं है, उसका अर्थ व्यापक है. हमारा जीवन...
‘चमकते प्रकाश में घुल-मिल गईं उषाएं’ऋग्वेद (मण्डल:१,सूक्ति:९२.२, अनुवाद-गोविन्द चंद्र पाण्डेय) सूर्य और जल भारतीय संस्कृति के केंद्र में हैं. ऋग्वेद में सूर्योदय पर अद्भुत कविताएँ मिलती हैं. हिंदी में...
वैद्य को कविराज भी कहा जाता था. प्राचीन सभी विद्याएँ छंद की मदद से कंठस्थ हो लम्बे समय तक सुरक्षित रहीं, चाहे...
दोहा ‘हिंदी’ का जातीय छंद है, जिस छंद में कबीर और बिहारी आदि महाकवि लिख चुके हों उसमें कुछ नया कहना और नये ढंग से कहना बहुत चुनौतीपूर्ण है. निदा...
‘At the end of my sufferingthere was a door.’Louise Glück समकालीन कवियों पर आधारित स्तम्भ ‘मैं और मेरी कविताएँ’ के अंतर्गत आपने निम्न कवियों की कविताएं पढ़ीं और जाना कि वे...
चित्र : steve mccurry हिंदी कविता में रिटायर्ड व्यक्ति की छवियां देखने को कम मिलती हैं. दयाशंकर शरण की इन कविताओं में इन्हें आप प्रमुखता से देख सकते हैं, पुराने...
बाबुषा कोहली किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. नई सदी की हिंदी कविता का जो मुहावरा बना है उसमें उनकी ख़ास उपस्थिति है. कथ्य और शिल्प दोनों स्तरों पर उन्होंने...
कवि के लिए कितना कुछ है देखने के लिए, कहने के लिए. कभी-कभी वह एक भीगते चित्र से कविता तराश लेता है. प्रशस्ति-गायकों के बीच महाराज की असलियत भी उससे...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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