अंकिता आनंद की कविताएँ
‘निकले तख़्त की खातिर दर-ब-दरसर झुका रहमत माँगने के इरादे से,उतरे खुदाई का फर्क बताने पर,खुदा बन गए, मुकरना ही था वादे से.’अंकिता आनंद की कविताओं में रंगमंच की हरकत...
‘निकले तख़्त की खातिर दर-ब-दरसर झुका रहमत माँगने के इरादे से,उतरे खुदाई का फर्क बताने पर,खुदा बन गए, मुकरना ही था वादे से.’अंकिता आनंद की कविताओं में रंगमंच की हरकत...
अर्चना लार्क कविताएं लिख रहीं हैं, और बेहतर लिखेंगी यह इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है. अर्चना लार्क की कविताएँ ...
कविताएँ अपनी जमीन से अंकुरित हों तो उनमें जीवन रहता है, अपने परिवेश से जुड़ कर उनमें स्थानीयता का यथार्थ-बोध, भाषा-बोली भी आ जाती है. प्रीति चौधरी की कविताओं में स्त्री...
चन्द्र गुरुङ नेपाली भाषा के चर्चित कवि हैं और वे नेपाली कविताओं का हिंदी मे अनुवाद भी करते हैं. ये कविताएं खुद कवि द्वारा अनूदित हैं. पढिए आपका खास पड़ोस...
(पेंटिग : Zoe Frank)‘फूल खिलते रहेंगे दुनिया मेंरोज़ निकलेगी बात फूलों की’प्रेम की बातें प्रेम जितनी ही सघन होती हैं. प्रेम कविता में पुकारता है और देह उसे कविता की...
तालिब हुसैन तालिब का एक सुंदर सा शेर है-‘देख कर तुम को हैरती हूँ मैंकिस क़दर हुस्न है ज़माने में’कवि सृष्टि को और सुंदर रचते हैं. वह उस सौन्दर्य को...
‘गाय की यौनेच्छा’ से गाय को पालने वाला हर व्यक्ति परिचित है. शायद कविता में गाय अपनी इस यौन–इच्छा और मनुष्य द्वारा उसके गर्भाधान की कृत्रिमता के साथ पहली बार...
अविनाश मिश्र जीवन की यातना के कवि हैं, कभी कामू ने कहा था कि आधुनिक मनुष्य सीसिफ़स की तरह शापग्रस्त है. रूटीन की यातना का उम्र क़ैद मुज़रिम. इसकी सज़ा...
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप कुमार (4 मार्च 1955, नगीना) अंग्रेजी अखबारों में इतिहास, साहित्य, शास्त्रीय संगीत और पेंटिंग पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. उनके भीतर कवि भी है जिसे...
कविता कवि और उसके परिवेश के बीच आकार लेती है. समर्थ कविताएँ अपने समय से टकराती हैं, बहुस्तरीय, दृश्य-अदृश्य, और जटिल सत्ताओं को समझने का प्रयास करती हैं. सत्ता ही...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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