सुमीता ओझा की कविताएँ
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने महत्वपूर्ण निबन्ध ‘कविता क्या है’ में लिखा है “ज्यों-ज्यों हमारी वृत्तियों पर सभ्यता के नये-नये आवरण चढ़ते जायँगे त्यों-त्यों एक ओर तो कविता की आवश्यकता...
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने महत्वपूर्ण निबन्ध ‘कविता क्या है’ में लिखा है “ज्यों-ज्यों हमारी वृत्तियों पर सभ्यता के नये-नये आवरण चढ़ते जायँगे त्यों-त्यों एक ओर तो कविता की आवश्यकता...
कवि अपनी कविताओं या कविता के विषय में क्या सोचते हैं ? इस रचनात्मक जिज्ञासा के साथ समालोचन यह स्तम्भ आरम्भ कर रहा है. इसके अंतर्गत आप समकालीन महत्वपूर्ण कवियों...
आशीष बिहानी इधर क्रमिक विकास के विविध चेहरों को उपमानों के माध्यम से कविता में चित्रित करने का प्रयास कर रहे हैं. इस नयी कविता में उन्होंने एंट्रोपी के माध्यम...
पूनम अरोड़ा कहानियाँ और कविताएँ लिखती हैं, नृत्य और संगीत में भी गति है. कविताओं की भाषा और उसके बर्ताव में ताज़गी और चमक है. बिम्बों की संगति पर और...
साहित्य के इतिहास में किसी काल-खंड में किसी ख़ास प्रवृत्ति को लक्षित कर उसे समझने और उसकी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए उसका नामकरण किया जाता है. हिंदी में...
“इधर किसी अत्यंत प्रतिभाशाली कवयित्री विजया सिंह की कुछ आश्चर्यजनक अनूठी कविताएँ आपने अपने मिलते-जुलते नाम विजया सिंह से छपा ली हैं. इस कृत्य की यूँ तो निंदा की जानी...
(पटना के बिहार म्यूजियम से)विनय कुमार मनोचिकित्सक हैं और हिंदी के लेखक भी. \'एक मनोचिकित्सक के नोट्स\', मनोचिकित्सा संवाद, \'मॉल में कबूतर\', ‘आम्रपाली और अन्य कविताएँ’ आदि पुस्तकें प्रकाशित हैं....
(फोटो आभार : H. C. Bresson)हिंदी कविता की दुनिया युवतर कवियों से आबाद है. ये कवि अपनी समझ और निपुणता के साथ जब सामने आते हैं तो विस्मय होता है...
(Virginie Demont Breton - FISHERMAN\'S WIFE AFTER BATHING CHILDREN , 1881)रुस्तम जीवन में भी मितभाषी हैं और यह समझते हैं कि जीवन आराम से जीने वाली चीज है जिससे कि...
(यह अद्भुत फोटो विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर H. C . Bresson द्वारा Romania में 1975. में कहीं लिया गया था. आभार के साथ)राजकमल प्रकाशन संस्थान से प्रकाशित कविता संग्रह ‘अपने आकाश में’...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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